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रूचिका मामला : सीबीआई को सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस

नई दिल्ली। रूचिका गिरहोत्रा छे़डछ़ाड मामले में जेल की सजा काट रहे हरियाणा के पूर्व पुलिस प्रमुख एस. पी. एस. राठौ़ड की एक याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया है।
राठौ़ड ने इस याचिका में खुद को दोषी ठहराए जाने और सजा बढ़ाए जाने के फैसले को चुनौती दी है। सर्वोच्चा न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. सथसिवम एवं न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की खंडपीठ ने यह नोटिस जारी किया। राठौ़ड के वकील ने दलील दी कि मुख्यमंत्री को दी गई शिकायत में रूचिका गिरहोत्रा के हस्ताक्षर नहीं हैं इसीलिए इसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत सबूत का हिस्सा नहीं माना जा सकता। आरोप है कि राठौ़ड ने रूचिका गिरहोत्रा के साथ छे़डछ़ाड किया और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री को शिकायत दिए जाने के बाद साक्ष्य की खोज की जिम्मेदारी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी आर.आर. सिंह को सौंपी गई थी। उल्लेखनीय है कि 16 वर्षीय स्कूली छात्रा रूचिका के साथ राठौ़ड ने 1990 में छे़डछ़ाड की थी। परिजनों के कथनानुसार राठौ़ड को बचाने के लिए पुलिस द्वारा रूचिका एवं परिवारवालों के उत्पी़डन किए जाने के कारण उसने 1993 में आत्महत्या कर ली थी। राठौ़ड के खिलाफ आपराधिक मामला 1997 में दर्ज किया गया। राठौ़ड को प्रारंभिक तौर पर छह माह की कैद हुई, जिसे सीबीआई की अपील पर 18 महीने कर दी गई। पंजाब एवं हरियाण उच्च न्यायालय द्वारा दोषी करार दिए जाने को चुनौती देते हुए राठौ़ड ने कहा कि 1993 में रूचिका के हस्ताक्षर युक्त शिकायत हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री को दिया गया, जिसे सबूत नहीं माना जा सकता। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि रूचिका ने शिकायत पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, जैसा कि राठौ़ड का कहना है, फिर भी यह सबूत बनता है, क्योंकि जांच के दौरान आर.आर. सिंह ने पीडित परिजनों से पूछताछ में शिकायत में लिखी गई बातों को सही पाया था। राठौ़ड को किशोरी रूचिका गिरहोत्रा से छे़डछ़ाड करने और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी ठहराया गया है। वह 25 मई से ही चण्डीगढ़ की बु़डैल जेल में कैद हैं।

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