शिलांग। असम राइफल्स के निवर्तमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल यादव का कहना है कि आतंकवादियों से ल़ड रहीं सशस्त्र सेनाओं के लिए विवादास्पद सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) एक ढाल की तरह काम करता है। जनरल यादव ने कहा, ""यह केंद्र और राज्य सरकारों के ऊपर है कि वे इस कानून को लागू करें या हटाएं या फिर इसमें परिवर्तन करें। वैसे मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि राज्य और केंद्र सरकारें ही हमें इस कानून से सशक्त बना सकती हैं।""
गुरूवार को सेवावृत्त होने जा रहे यादव ने कहा कि एएफएसपीए का बहुत हद तक राजनीतिकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून सशस्त्र सेनाओं को वे जो करते हैं उसके लिए कानूनी स्वतंत्रता देता है न कि उन्हें मनमानी करने का अधिकार देता है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जम्मू एवं कश्मीर, मणिपुर, त्रिपुरा, असम और नागालैंड, पूर्वोत्तर के मेघालय सहित कुछ इलाकों में लागू एएफएसपीए सशस्त्र सेनाओं को आतंकवादी गतिविधियों वाले इलाकों में संदिग्ध आतंकवादियों को मारने या उनकी गिरफ्तारी की इजाजत देता है। यादव ने कहा, ""एक जवान तभी गोली चलाएगा जब उसे निशाना बनाया जाएगा।
उसे पूरे राष्ट्र के हित में त्वरित फैसला लेना होता है। इसके लिए उसे अदालत में नहीं खींचा जाना चाहिए।"" वैसे मेघालय के राज्यपाल आर.एस. मूशाहारी एएफएसपीए को हटाए जाने की वकालत करते हैं। वह कहते हैं कि इस कानून के लंबे समय तक इस्तेमाल से समाज प्रभावित होगा।





















