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राष्ट्रमंडल खेल: चानू ने कहा, किस्मत ने साथ नहीं दिया

नई दिल्ली। दिल्ली में हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2010 में भारत की झोली में पहला पदक डालने वाली भारोत्तोलक, सोनिया चानू का कहना है कि भाग्य और भगवान उनके साथ नहीं थे, जिसके कारण ही वे स्वर्ण पदक जीत पाने में विफल रहीं।

चानू ने 48 किलोग्राम महिला वर्ग में रजत पदक जीता है। चानू ने यहां कहा, ""भगवान मेरे साथ नहीं थे या फिर भाग्य ने आज मेरा साथ नहीं दिया। इसी कारण स्वर्ण पदक मेरे हाथ से निकल गया और मैं निराश हंू। मैं वाकई दुखी हूं, क्योंकि मैं अपने कोच का सपना साकार नहीं कर सकी और लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई।"" चानू ने कहा, ""मैंने इस दिन के लिए कठिन परिश्रम किया था और स्वर्ण जीतना चाहती थी। मेरे प्रदर्शन में ही कुछ ग़डब़डी हुई होगी, क्योंकि मैं छह प्रयासों में केवल दो बार वजन उठाने में कामयाब हो पाई थी।"" मणिपुर के इम्फाल में पैदा हुई चानू 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण के लिए भारत की एक प्रबल दावेदार थीं। पेशेवर खेल के रूप में भारोत्तोलन को अपनाने से पहले वे दौ़ड में थीं और कनिष्ठ राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में कई पदक जीत चुकी थीं।

मणिपुर पुलिस में कार्यरत चानू ने 2009 राष्ट्रमंडल चैम्पियनशिप में एक स्वर्ण जीता था और 2003 में एफ्रो-एशियाई खेलों में एक रजत जीता था। चानू के कोच हरनाम सिंह ने भी इसी तरह की निराशा प्रकट की। उन्होंने कहा, ""मैं न केवल निराश हूं, बल्कि सभी से क्षमा मांगना चाहता हूं क्योंकि स्वर्ण पदक हमारे हाथ से निकल गया। खेलों की शुरूआत से पहले, हम कम से कम 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक को लेकर पूरे भरोसे में थे, लेकिन हम हार गए।"" सिंह ने कहा, ""मैं चानू की रणनीति को दोष नहीं देना चाहता, यह केवल दुर्भाग्य के कारण हुआ। मुझे न केवल टीम के लिए दुख महसूस हो रहा है, बल्कि पूरे भारोत्तोलक परिसंघ के लिए और अपने सचिव सहदेव यादव के लिए भी।"" राष्ट्रमंडल खेल 2010 में पहला स्वर्ण पदक नाइजीरियाई खिल़ाडी अगस्टिना नाओकोला (17) की झोली में गया है। नाओकोलो ने राष्ट्रमंडल में एक रिकॉर्ड भी स्थापित किया है। इस महिला खिल़ाडी ने कुल 175 किलोग्राम वजन उठाया। स्त्रैच वर्ग में 77 किलोग्राम और क्लीन एवं जर्क वर्ग में 98 किलोग्राम। नाओकोलो ने कहा, ""मैं ईश्वर की बहुत आभारी हूं। यह सुनियोजित रणनीति का परिणाम है। मुझे भरोसा हो गया है कि भारोत्तोलन में मैं कोई भी कीर्तिमान तो़ड सकती हंू।""  

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