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भारत समाचार

घाटी में कफ्र्यू में ढील, विरोध प्रदर्शन का नया कार्यक्रम जारी

श्रीनगर/नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर के लिए घोषित आठ सूत्री कार्यक्रमों से आम कश्मीरियों में जगी शांति की आस के बीच प्रशासन ने रविवार को कफ्र्यू में ढील दी। लेकिन सरकार के इस कदम से नाखुश अलगाववादियों ने विरोध प्रदर्शन के लिए 10 दिवसीय नए कार्यक्रम की घोषणा कर दी।
इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य में रोजगारपरक योजनाओं में प्रगति की समीक्षा की और विशेषज्ञ समिति को रोजगार के स्थायी अवसर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में तनावपूर्ण स्थिति में सुधार को देखते हुए प्रशासन ने रविवार को कफ्र्यू में ढील दी। श्रीनगर के एक अधिकारी ने बताया, ""शहर के हजरतबल, जैदीबल, जाकुरा, सौरा पुलिस स्टेशन में रविवार को 11 बजे से कफ्र्यू में छूट दी गई।"" अधिकारी ने कहा, ""घाटी के सभी शहरों में चरणबद्ध तरीके से कफ्र्यू एवं प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी। यह फैसला कानून एवं व्यवस्था की स्थिति में सुधार को देखते हुए उठाया गया है।"" हुर्रियत संगठन के कट्टरपंथी ध़डे के नेता सैयद अली गिलानी ने रविवार को लोगों से रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियां शुरू करने की अपील तो की। लेकिन उन्होंने बंद का एक दस दिवसीय नया कार्यक्रम भी जारी कर दिया। शहर में रविवार को छुट्टी होने के बावजूद दुकानें, बाजार और अन्य प्रमुख प्रतिष्ठान खुले और इस दौरान लोगों ने आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी की। वाहनों की भी आवाजाही रही। इधर, दिल्ली में प्रधानमंत्री ने जम्मू एवं कश्मीर में रोजगार में वृद्धि की योजना में प्रगति की समीक्षा की और विशेषज्ञ समिति को रोजगार के स्थाई अवसर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। रविवार को जारी एक बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री ने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति से शनिवार शाम मुलाकात की। समिति ने उन्हें योजना में हुई प्रगति से अवगत कराया। बयान में कहा गया, ""प्रधानमंत्री ने कहा कि समिति कौशल निर्माण, शिक्षा और उद्योगों में नागरिक समितियों का जु़डाव जैसे सभी मुद्दों पर ध्यान देते हुए रोजगार के स्थाई अवसर सुनिश्चित करे।"" विशेषज्ञ समिति ने प्रदेश में रोजगार बढ़ाने के लिए किए जा रहे दीर्घकालिक उपायों की जानकारी दी। इस बीच कश्मीर के लिए घोषित आठ सूत्री कार्यक्रम से आम कश्मीरियों में शांति की आस दिख रही है। श्रीनगर के एक दुकानदार बशीर अहमद भट्ट का कहना है, ""मैं यही उम्मीद और दुआ करता हूं कि कश्मीर में अमन बहाल हो और मौत व बर्बादी का मंजर थम जाए।"" भट्ट ने कहा, ""यह कहना कठिन है कि सरकार की घोषणा का जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव प़डेगा, लेकिन मैं इससे बेहतरी की उम्मीद करता हूं। मेरी यही दुआ है।"" इसी तरह स्थानीय निवासी नजीर अहम कहते हैं, ""अगर सभी पक्ष गंभीर हों तो कश्मीर समस्या का हल ढूंढ़ना मुश्किल नहीं है। अभी भी देर नहीं हुई है। किसी को हमें उस पी़डा से मुक्त कराने के लिए आगे आना चाहिए जिसका हम लागातार सामना कर रहे हैं।"" राज्य की मुख्य विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने भी सरकार की घोषणा का स्वागत किया है। पार्टी के नेता नईम अख्तर ने कहा, ""यह एक अच्छी शुरूआत है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए अच्छी शुरूआत का होना जरूरी है।"" अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा कि नई दिल्ली ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह कश्मीर मसले का हल करने को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा, ""यहां कोई आर्थिक पैकेज के लिए अपनी जान नहीं देता है। चिदम्बरम की घोषणा तो हमारी बुनियादी मांगों के मुताबिक भी नहीं है।"" गिलानी ने एक बयान में दस दिवसीय विरोध प्रदर्शन का एक नया कार्यक्रम घोषित किया। बयान में कहा गया है, ""सोमवार को कश्मीर में पूर्ण बंदी आयोजित की जानी चाहिए। लोगों को अपना विरोध प्रदर्शन जाहिर करना चाहिए और इंटरनेट के जरिए विश्व समुदाय को कश्मीर की घटनाओं से अवगत कराना चाहिए।"" अलगाववादियों ने लोगों से आग्रह किया है कि 28 सितम्बर को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बीच पूर्ण बंदी आयोजित की जाए। लेकिन 29 सितम्बर को कोई बंदी नहीं होगी और लोग सामान्य गतिविधियों में सक्रिय रहेंगे। 30 सितम्बर को लोगों से फिर पूर्ण बंदी रखने के लिए और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए कहा गया है। बयान में कहा गया है, ""पहली अक्टूबर, शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद लोगों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित करना चाहिए, जबकि उस दिन बंदी न रखी जाए। दो अक्टूबर को पूर्ण बंदी रखी जानी चाहिए। तीन अक्टूबर को शहीदों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने के लिए बारामूला के लिए मार्च किया जाना चाहिए।"" अलगाववादियों ने चार अक्टूबर को फिर पूर्ण बंदी का आह्वान किया है और पांच अक्टूबर को लोगों से कुपव़ाडा कस्बे की ओर मार्च करने के लिए कहा है। बयान में कहा गया है कि छह अक्टूबर को दिन भर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाना चाहिए। लेकिन बयान में यह भी कहा गया है कि शाम सात बजे से सुबह सात बजे के बीच कोई बंदी नहीं रखी जाएगी। उधर, दो अन्य अलगाववादी नेताओं मीरवाइज फारूख और यासीन मलिक ने कहा है कि वे पैकेज की समीक्षा के लिए एक बैठक बुलाएंगे और फिर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।

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