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भारत समाचार

फिल्म समीक्षा: गोलमाल-3

निर्माता: ढिलिन मेहता
निर्देशक: रोहित शेट्टी
संगीत: प्रीतम
कलाकार: अजय देवगन, अरशद वारसी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपदे, मिथुन चक्रवर्ती, कुणाल खेमू, करीना कपूर, प्रेम चोपडा।
समीक्षा:
निर्देशक रोहित शेट्टी की फिल्म गोलमाल-3 में बहुत सारे फनी सीक्वेंसेस को जोडा गया है। बीच में कुछ एक्शन दृश्य भी है जिसमें रोहित ने अपनी आदत के मुताबिक कारों को उडाया है। गोलमाल फिल्म्स की कहानी के पैटर्न की नकल करते हुए इस फिल्म में भी कहानी से ज्यादा इस बात का ध्यान रखा गया है कि किसी चुटकुले को कितना लंबा खींचा जा सके।
कहानी: मिथुन चक्रवर्ती और रत्ना पाठक शाह ऎसे प्रेमी-प्रेमिका है जो शादी नहीं कर पाए। मिथुन तीन अनाथ बच्चों (अरशद वारसी, कुणाल खेमू और तूषार कपूर) को और रत्ना दो अनाथ बच्चों (अजय देवगन, श्रेयस तलपडे) को पालते है। बरसों बाद मिथुन और रत्ना फिर मिलते है। लुकाछिपी का खेल फिर शुरू हो जाता है और अजय की गर्लफ्रेंड करीना कपूर के प्रयासों से मिथुन और रत्ना शादी कर लेते है, लेकिन उनके बच्चों में आपस में नहीं पटती। एक दूसरे को नीचा दिखाने की उनमें होड लग जाती है और कई हास्यास्पद परिस्थितियां उत्पन्न होती है।
आखिर में उनके अनाथ होने का भेद खुल जाता है और उसके बाद वे एक सुखी परिवार की तरह रहने लगते है।  
एक निर्देशक के रूप में रोहित कुछ नया नहीं कर पाए है और अपने आपको ही दोहरा रहे है। कॉमेडी के साथ-साथ उन्हें कहानी, इमोशंस और म्यूजिक पर भी ध्या देना चाहिए।
फिल्म का संगीत निराशाजनक है और हिट गानों की कमी खलती है। अजय देवगन ने गुस्सैल युवक की भूमिका बेहतरीन तरीके से अभिनीत की है। कुणाल खेमू और अरशद वारसी की कॉमिक टाइमिंग बहुत अच्छी है। एकमात्र नायिका के रूप में करीन अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है। गूंगे के रूप में तुषार कपूर कुछ दृश्यों में हंसाते है तो कुछ मे उन्हें देख खीच पैदा होती है जॉनी लीवर का किरदार सिनेमा हॉल के बाहर निकलने के बाद भी याद रहता है।

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