नई दिल्ली। एक नए शोध के मुताबिक देश में मलेरिया से प्रतिवर्ष होने वाली मौतों की संख्या अनुमान से बहुत ज्यादा है। आंक़डों के मुताबिक भारत में मलेरिया से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमान से 13 गुना अधिक मौतें होती हैं।
वेबसाइट "बीबीसी डॉट को डॉट यूके" के मुताबिक शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में हर साल होने वाली 200,000 से ज्यादा मौतों की वजह मलेरिया बीमारी होती है। "यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ", "कैनेडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ" और "ली का सिंह नॉलेज इंस्टीट्यूट" ने संयुक्त रूप से यह शोध किया था। इन नए आंक़डों से दुनियाभर में मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या को लेकर संशय की स्थिति है। अध्ययन में कहा गया है कि अक्सर जब मरीज को तेज बुखार होता है तो उसकी बीमारी का ठीक से पता नहीं लगाया जाता है और कई बार मलेरिया की जगह कोई और रोग मानकर उसका इलाज किया जाता है। इस अध्ययन में कई परिवारों से पूछा गया था कि उनके रिश्तेदार की मौत किस तरह से हुई। इसके बाद दो चिकित्सकों ने परिवार द्वारा बताए गए कारणों का अध्ययन कर तय किया कि वे मौतें किसी और बीमारी से हुई थीं या मलेरिया है। आंक़डे बताते हैं कि 70 साल से कम आयु के लोगों की हर साल होने वाली मौतों में से 205,000 मौतों की वजह मलेरिया होता है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भारत में 2006 में मलेरिया से 10,000-21,000 मौतें होने का अनुमान है। टोरंटो स्थित "सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च" के अध्ययनकर्ता प्रभात झा कहते हैं कि मलेरिया न केवल बच्चों को बल्कि ब़डी संख्या में युवाओं को भी मार रहा है। उन्होंने कहा कि भारत घनी आबादी वाला देश है और जहां होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण मलेरिया है।





















