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भारत समाचार

मेघालय की पनार जनजाति भी करती है दुर्गा पूजा

नरतियांग (मेघालय)। दुर्गा पूजा हिंदुओं के सबसे ब़डे धार्मिक त्योहारों में से एक है लेकिन मेघालय की पनार जनजाति भी शक्ति की देवी की उपासना करने में पीछे नहीं है, वह भी इस त्योहार को भक्ति और उत्साह पूर्वक मनाती है।

सैक़डों की संख्या में पनार समुदाय के लोग जिन्हें जैंतिया भी कहा जाता है और पर्यटक नरतियांग के प्राचीन मंदिर में पांच दिनों तक चलने वाले इस दुर्गा पूजा के लिए एकत्र होते हैं। यह मंदिर शिलांग से 65 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। मंदिर में पूजा करने की परंपरा 500 वर्षो से भी अधिक समय से चली आ रही है। मंदिर की प्राचीनता को लेकर स्थानीय इतिहासकारों और पनार जनजाति के लोगों में मतभेद है।

जैंतिया हिल्स जिले में दुर्गा ब़ाडी की पह़ाडी के शिखर पर स्थित इस मंदिर का निर्माण जैंतिया जनजाति के राजाओं द्वारा करीब 16वीं से 17वीं शताब्दी के बीच किया गया। गांव के मध्य में स्थित मंदिर को ईंट से बनाया गया है। प्रसिद्ध भारतीय इतिहासकार जे.बी. भट्टाचार्य ने बताया, ""नरतियांग जैंतिया राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। इसकी स्थापना बांग्लादेश के सिलहट जिले के जैंतियापुर में की गई थी।"" मंदिर के पुजारी मलय देशमुख ने बताया, ""जैंतिया राजाओं की 22 पीढि़यों ने पैतृक देवियों दुर्गा और जयंतेश्वरी की पूजा की है।"" मंदिर में दुर्गा और जयंतेश्वरी देवी की मूर्तियों को एक साथ रखकर पूजा की जाती है। अष्टधातु से निर्मित दोनों मूर्तियों की लंबाई छह से आठ इंच है। एक बीस वर्षीय युवक ने बताया, ""दुर्गा पूजा के दौरान अनुष्ठान और धार्मिक कार्य हिंदू मान्यताओं के अनुसार किए जाते हैं। पूजा शुरू करने से पहले देवियों की मूर्तियों का जलाभिषेक किया जाता है, इसके बाद उन्हें रंग-बिरंगे वस्त्र पहनाए जाते हैं।"" पुजारी ने बताया कि जैंतिया राजाओं के शासन में यहां नरबलि देने की भी प्रथा थी। माना जाता है कि अंग्रेजों ने इस प्रथा पर रोक लगा दी। मलय ने बताया, ""अब यहां कक़डी के साथ बकरियों, मूर्गो और कबूतरों की बलि दी जाती है।""

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