बेंगलुरू। दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पहली कर्नाटक सरकार एक बार फिर संकट में फंस गई है। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से अंसतुष्ट 21 विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल हंसराज भारद्वाज से मिलकर सरकार से समर्थन वापस लेने का पत्र सौंप दिया। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को 12 अक्टूबर तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने को कहा है।
इस बीच, येदियुरप्पा ने राज्यपाल को समर्थन वापसी का पत्र सौंपने वाले चार मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करने की सिफारिश की है। ये चारों मंत्री निर्दलीय विधायक हैं। भाजपा की पहली सरकार इन्हीं की मदद से बनी थी। येदियुरप्पा ने संवाददाताओं से कहा, मैंन राज्यपाल से लघु उद्योग मंत्री शिवराज एस तागाडागी, वस्त्र और रेशम उद्योग मंत्री वेंकटरमनप्पा, समाज कल्याण मंत्री ए नारायण स्वामी और युवा व जेल मामलों के मंत्री डी सुधाकर को मंत्रिपरिषद से हटाए जाने की सिफारिश की है। इन विधायकों ने मेरी सरकार पर अविश्वास जताया है।
इन मंत्रियों को बर्खास्त करने का फैसला कैबिनेट की आपात बैठक में लिया गया, जो राज्यपाल का समर्थन वापसी का पत्र सौंपे जाने के बाद बुलाई गई थी। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को सौंपे गए समर्थन वापसी के पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पार्टी के 15 विधायकों को सलाह दी है कि वे पार्टी से निष्कासन सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। साथ ही उन्होंने कहा कि वह राज्य की ताजा स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुधवार सायं राज्यपाल से मिलेंगे।
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संकट में येदियुरप्पा सरकार, 21 विधायकों का समर्थन वापस





















