पटना। बिहार में नक्सलियों ने बंधक बनाए गए चार पुलिसकर्मियों को छो़डने की एवज में अपने जिन आठ साथियों की रिहाई की मांग की है, उनमें से सात को राज्य की पुलिस ज्यादा खूंखार नहीं मानती। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक नक्सलियों ने जिन आठ साथियों की रिहाई की बात की है उनमें से एक बांका जेल में बंद जय पासवान ही एक ऎसा है जिस पर डेढ़ दर्जन से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं जबकि अन्य के साथ ऎसा नहीं हैं।
पासवान के अलावा जिन सात नक्सलियों को छो़डने की शर्त रखी गई है उनमें विजय चौधरी, प्रमोद वरनवाल, रमेश टिर्की, रामविलास पासी, अर्जुन को़डा, रत्तू को़डा और विश्वनाथ बैठा हैं। ये सभी भागलपुर, बांका, और जमुई जेल में बंद हैं।
इन सभी जेलों सुरक्षा व्यवस्था क़डी कर दी गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जेल में बंद इन संदिग्ध नक्सलियों पर ज्यादातर जबरन पैसा वसूलने के मामले दर्ज हैं। सूत्रों का कहना है कि इन लोगों का क्षेत्र मुख्य रूप से नवादा से लेकर जमुई तक फैला था। पुलिस सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इनकी रिहाई के लिए सौदेबाजी करने का मामला समझ नहीं आ रहा है। उल्लेखनीय है कि बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों में प्रशिक्षु पुलिस सहायक निरीक्षक रूपेश कुमार सिन्हा (बेतिया), सहायक निरीक्षक अभय यादव (बेगूसराय), बिहार सैन्य बल के हवलदार एहतशाम खान (मांडर, रांची) तथा बीएमपी का लुकस टेटे (सिमडेगा, झारखंड) शामिल हैं।
भारत समाचार
नक्सलियों के 7 साथियों को खूंखार नहीं मानती पुलिस





















