नई दिल्ली। आपने यदि कैशलेस मेडिक्लेम कराया है और आप यह सोच रहे है कि बीमार होने पर बीमा कंपनियां आपके इलाज पर आने वाले खर्च का हुबहू भुगतान कर देंगी, तो अब आप इसे भूल जाइए। चार राष्ट्रीय बीमा कंपनियों समेत 18 निजी इंश्योरेंस कंपनियों ने ऎसा करने से इंकार कर दिया है। यही नहीं, राजधानी समेत देश के करीब 150 निजी अस्पतालों को काली सूची में भी डाला गया है। इन अस्पतालों पर आरोप है कि जब उन्हें पता चलता है कि उनके यहां उपचाराधीन रोगी के पास कैशलेस पॉलिसी है तो वे अधिक बिल बना कर देते है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीआर) समेत राजधानी के नामचीन अस्पतालों में शामिल सर गंगाराम, अपोलो, फोर्टिस, मैक्स हेल्थकेयर, मेडीसिटी, वेदांता समेत 160 से ज्यादा निजी अस्पतालों ने एक जुलाई से रोगियों से इलाज प्रारंभ करने से पहले ही शुल्क वसूलना भी शुरू कर दिया है। बीमा कंपनी की संस्था थर्ड पार्टी इंश्योरेंस (टीपीआई) के सीईओ पवन भल्ला ने कहा, अनुमान है कि अस्पतालों द्वारा अधिक बिल वसूलने से हर साल बीमा कंपनियों को करीब 1500 करोड रूपये का नुकसान हो रहा है। जबकि देशभर में करीब 6 हजार करोड रूपये मेडिक्लेम प्रीमियम के रूप में उपभोक्ताओं से वसुला जाता है। देशभर में करीब 3 हजार अस्पतालों में कैशलेस बीमा की सुविधा प्रदान की जा रही है। टीपीए द्वारा कराए गए एक सर्वे में पाया गया कि 350 अस्पतालों में भर्ती हुए रोगियो को 11 फीसदी चिकित्सीय सेवाएं> प्रदान की गई, लेकिन उन्होंने बिल के रूप में 80 फीसदी भुगतान कराने का दावा किया है।
भारत समाचार
मेडिकल इश्योरेंस में कैशलेस सुविधा बंद





















