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भारत समाचार

झुंझलाने को मजबूर तो नही करता सेलफोन

नई दिल्ली। छोटा सा सेलफोन अधिकतर लोगों के जीवन का जरूरी हिस्सा बन गया है। संचार की इस छोटे कद की बडी सी सुविधा से बडे-बडे काम बहुत आसानी से किए किए जा सकते है मगर तरीके से इनका उपयोग न करने पर यह काम की चीज आपको झुंझलाने के लिए मजबूर भी कर सकती है।
मोबाइलफोबिया के इस बढते चलन न तौर-तरीकों की एक अलग संहिता तय करने की जरूरत का भी एहसास कराया है। अगर ढंग नही बदले तो यह सेलफोन दुश्वारियों की वजह भी बन जाता है। एटीकेट स्पेशलिस्ट उपासना सिंह कहती है कि मीटिंग, अस्पताल, अदालत परिसर, थिएटर, सिनेमाघर, पूजाघर,स्कूल आदि में सेलफोन की घंटी गहरा व्यवधान उत्पन्न करती है। इसलिए इन जगहों पर जाने से पहले सेलफोन को वायसमेल पर या वाइब्रेशन पर रखना चाहिए ताकि किसी को दिक्कत न हो।
मीटिंग में सेलफोन को बंद कर देना ही बेहतर होता है। एक अन्य एटीकेट स्पेशलिस्ट गौरव दास कहते है कि सेलफोन पर कई लोग जोर जोर से बात करते हैं जिससे निजी या गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक हो सकती है।
दूरसंचार नियामक ट्राई के अनुसार मई, 2010 के आखिर तक देश में सेलफोन उपभोक्ताओं की संख्या 61.753 करोड थी। अनुसंधान फर्म गार्टनर के आंकडे कहते हैं कि साल 2010 तक देश में सेलफोन कनेक्शनों की संख्या बढकर 99.3 करोड हो जाएगी।

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