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भारत समाचार

मप्र के 20 जिलों पर सूखे का साया

भोपाल। मानसून गुजर गया है और इस बार आधे मध्य प्रदेश को प्यासा ही छो़ड गया है। हाल यह है कि प्रदेश के 20 जिलों पर सूखे का साया मंडराने लगा है।
ये वे जिले हैं, जहां औसत के मुकाबले 45 से 75 फीसदी ही बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून की अवधि 30 सितम्बर तक ही मानी जाती है। इस तारीख तक पूरे प्रदेश में औसत से 16 फीसदी कम वर्षा हुई है। प्रदेश के 50 जिलों में से 20 में बारिश का आंक़डा 75 फीसदी तक ही पहुंच पाया है, यानी यहां 25 फीसदी से भी कम बारिश हुई है, जबकि सात जिलों में 80 प्रतिशत तक बारिश दर्ज की गई है। वहीं आठ जिले ऎसे हैं, जहां औसत से ज्यादा बारिश हुई है।
प्रदेश में सूखे का आकलन बारिश के प्रतिशत को आधार मानकर किया जाता है। जिन इलाकों में औसत से 25 प्रतिशत कम बारिश होती है, उसे सूखाग्रस्त क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाता है। राज्य सरकार ने इसके लिए तहसील को इकाई माना है। प्रदेश के 20 जिलों अनूपपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया, भोपाल, गुना, हरदा, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर और विदिशा में औसत से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसी तरह प्रदेश के छह अन्य जिले मंदसौर, उज्जैन, झाबुआ, होशंगाबाद, अलीराजपुर, देवास में बारिश 20 से 25 फीसदी कम हुई है। इस हिसाब से प्रदेश के 26 ऎसे जिले हैं, जहां सूखे की छाया मंडरा रही है। राजस्व विभाग के अनुसार सरकार ने सूखे के आकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी 50 जिलों के कलक्टरों से उनके जिले की तहसीलों की स्थिति की जानकारी मांगी गई है।

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