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आधारभूत संरचना की खाई पाटने में सहयोग करे जी-20 : प्रधानमंत्री

सियोल। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को यहां संरक्षणवाद से आगाह करते हुए वैश्विक वित्तीय प्रणाली को संतुलित करने पर जोर दिया, ताकि इस प्रणाली से अमीर देशों से पूंजी का प्रवाह गरीब देशों में हो और इस पूंजी से आधारभूत संरचना का विकास किया जा सके। प्रधानमंत्री जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शाम को यहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन के सदस्य देश ताजा वैश्विक आर्थिक संकट को ध्यान में रखते हुए विकास के प्रारूप पर अवश्य ध्यान दें। उन्होंने सदस्य देशों को सुनिश्चित किया कि भारत इस मामले में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा।
शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कहा था, ""विश्व की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट से उबर रही है, लेकिन हमें वैश्विक परिणामों को अपने अनुकूल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"" उन्होंने कहा, ""इस समय विकास की चुनौतियां हमारे सामने हैं। इस दौर में एक खुले, स्थिर और नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक माहौल चाहे वह व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण या खुले बाजार का हो, भारत के हित में है।"" प्रधानमंत्री ने सियोल सम्मेलन के मुख्य बिंदु "शेयर्ड ग्रोथ बियांड द क्राइसिस" पर कहा कि उन्हें लगता है कि विश्व स्थिर और संतुलित विकास के लिए ताजा मंदी के दौर से उबर चुका है।
उल्लेखनीय है कि सियोल रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने सोमवार को दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान विश्व की अर्थव्यवस्थाओं के बीच सही संतुलन बनाने पर जोर दिया था। सियोल में हो रहे इस सम्मेलन के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा था, ""हम आर्थिक विकास से जु़डे संतुलन के लिए दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करेंगे। सियोल में हम इस बात की कोशिश करेंगे कि विकास के एजेंडे पर जी-20 मुख्य तौर पर अपना ध्यान केंद्रित करे।"" मनमोहन सिंह का यह तीन दिनों का सियोल दौरा वैश्विक वित्तीय स्थिरता को हासिल करने के संदर्भ में भारतीय दृष्टिकोण के लिहाज से बेहद अहम है। भारत यहां मुख्य रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका के विस्तार पर जोर देगा। भारत इस सम्मेलन के दौरान विकसित, विकासशील और गरीब देशों के बीच विकास का संतुलन बनाने के अपने रूख को पुरजोर ढंग से रखने की कोशिश करेगा। इस सम्मेलन में शामिल होने के साथ प्रधानमंत्री कई द्विपक्षीय मुलाकातें भी करेंगे। वह मुख्य रूप से दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति म्यूंग बक से मिलेंगे जहां दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और केंद्रीय वित्त सचिव अशोक चावला हैं। वर्ष 1999 में गठित हुए जी-20 में भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ हैं। प्रधानमंत्री ने सोमवार को अमेरिका और चीन के मुद्रा बाजारों का हवाला देते हुए कहा था कि दुनिया को अमीर और गरीब देशों के बीच एक नया संतुलन बनाने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि पूर्वी एशियाई आर्थिक संकट के बाद वर्ष 1999 में जी-20 सम्मेलन मुख्य रूप से वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गर्वनरों के स्तर पर शुरू हुआ था। इसकी महत्ता को देखते हुए वर्ष 2008 में इसे शिखर सम्मेलन का रूप दिया गया।

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