नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की चुस्त मौद्रिक नीतियों के प्रतिक्रियास्वरूप अपनी ब्याज दरें नहीं बढ़ाएंगे लेकिन देश के शीर्ष बैंकों का इसके विपरीत मत है। भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष ओ.पी.भट्ट ने एक सवाल के जवाब में आईएएनएस से कहा, ""ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है और मैं समझता हूं कि जल्द ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी।"" भट्ट ने कहा कि आरबीआई की चुस्त मौद्रिक नीति ने व्यवस्था में तरलता पर दबाव बना रखा है। उन्होंने कहा, ""तरलता तो है, लेकिन कम है।"" ज्ञात हो कि मुद्रास्फीति पर नियंत्रण की कोशिश में आरबीआई, मार्च महीने से अब तक रिवर्स रेपो दर (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से धन लेती है) में 125 आघार अंकों और रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात व सांविधिक तरलता अनुपात में 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर चुका है। ताजा बढ़ोतरी 27 जुलाई को की गई थी। उस समय आरबीआई ने अल्पकालिक उधारी पर ब्याज दर 50 आधार अंक बढ़ा दिया था और ऋण पर ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर दी थी। मुखर्जी ने दिन में संवाददाताओं को बताया था कि व्यवस्था में पर्याप्त तरलता है और बैंक ब्याज दरें नहीं बढ़ाएंगे। मुखर्जी से पूछा गया कि क्या आरबीआई की चुस्त मौद्रिक नीति की प्रतिक्रियास्वरूप बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाएंगे, इस पर मुखर्जी ने कहा, ""मैं ऎसा नहीं समझता। बैंक इससे भलीभांति परिचित हैं और उन्होंने इस पर गौर किया है।"" मुखर्जी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आरबीआई की नीति के अनुसार अपनी योजनाओं को व्यवस्थित कर लिया है और उन्हें ब्याज दरों में वृद्धि की कोई आवश्यकता नहीं है। बैंक ऑफ ब़डौदा के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एम.डी.माल्या ने भी मुखर्जी के विपरीत विचार व्यक्त किया। उन्होंने आईएएनएस को बताया, ""आरबीआई की चुस्त मौद्रिक नीति ने वाकई में तरलता और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ा दिया है।"" बैंक ऑफ ब़डौदा पहले ही अपनी ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर चुका है। इसके अलावा कई अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। देश के दूसरे ब़डे ऋणदाता, पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी ब्याज दर में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी किया है। कारपोरेशन बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स ने भी अपनी-अपनी ब्याज दरों में 50-50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है।
भारत समाचार
तरलता और दर वृद्धि योजना पर मुखर्जी व बैंकों में मतभेद





















