नई दिल्ली। अब सिम कार्ड लेने में थोडी मुश्किलों का सामना करना पड सकता है। क्योंकि सरकार सुरक्षा को देखते हुए दूरसंचार ने उपभोक्ताओं की गहरी जांच-पडताल का नियम लागू करने जा रही है जिसका देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने विरोध किया है।
इन कंपनियों का कहना है कि यह उनकी नहीं, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है। दूरसंचार विभाग की तरफ से मंगलवार भेजे गए 14 पृष्ठों के मसौदे पर चर्चा करने के लिए बुधवार को मोबाइल फोन सेवा प्रदान करने वाले कंपनियों के शीर्ष अधिकारी दिल्ली में मौजूद थे। इन नए नियमों को दूरसंचार विभाग ने गृह मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया है। कंपनियों का कहना है कि इन नियमों को लागू करने से भारतीय दूरसंचार उद्योग की रफ्तार को झटका लग सकता है। गृह और दूरसंचार मंत्रालय चाहते है कि टेलीकॉम कंपनियां वर्तमान कार्यप्रणाली में बदलाव करे, जिसके अनुसार रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर सिमकार्ड का स्टॉक रखते है और उनका वितरण करते है। मंत्रालय चाहते हैं कि दूरसंचार कंपनियां के्रडिट कार्ड कंपनियों सरीखा मॉडल अपनाएं जिसके अनुसार उपभोक्ताओं को सिम डाक से या कूरियर के द्वारा भेजे जाएं और इसके बाद सिम को एक्टिवेट करने के लिए अलग से एक पिन भेजा जाए। दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि इससे लाखों रीटेलरों और फ्रेंचाइजी का कारोबार प्रभावित होगा, जो फिलहाल उपभोक्ताओं से दस्तावेज लेते हैं और सेल्युलर कनेक्शन बेचते है। टेलीकॉम फर्मो से हर रीटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर का पता-ठिकाने जांचने को कहा गया है और प्रस्तावित नियमों के अनुसार, रीटेलरों को किसी भी भूल के लिए टेलीकॉम कंपनियों को दंड मिलेगा। मसौदा नियमों में कहा गया है कि कंपनियों को देश में 70 करोड सेल्युलर कनेक्शनों से जुडे दस्तावेजों की वापस जांच करनी होगी। इस पर कंपनियों का कहना है कि इसमें खर्च अधिक आएगा। मसौदा नियमों के अनुसार, उन सभी उपभोक्ताओं के कनेक्शन निश्चित तौर पर कैंसिल किए जाने चाहिए जिन्होंने अपना पता बदलने के बाद इसकी सूचना अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को नही दी है।
भारत समाचार
नया सिम कार्ड लेने में अब आएगा पसीना





















