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भारत समाचार

उप्र में नदियों के जलस्तर में कमी, हालात में सुधार

लखनऊ। बाढ़ का कहर झेल रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हालात में सुधार हो रहा है। बारिश और उत्तराखण्ड के कालागढ़, नंद सागर, भमगो़डा बांध से लाखों क्यूसेक पानी छो़डे जाने से उफनाई गंगा, रामगंगा, कोसी और मालन नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है। बाढ़ से करीब 500 गांवों की पांच लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है। रामगंगा, मालन, कोसी और गंगा नदी के उफान पर आने से बिजनौर, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर, बदायंू और फर्रूखाबाद जिलों के निचले इलाकों में 500 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बिजनौर से अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से उत्तराखण्ड के बांधों से ब़डी मात्रा में पानी नहीं छो़डा गया है। इससे गंगा, रामगंगा जैसी नदियों के जलस्तर में कमी आने से हालात में सुधार हो रहा है। प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत कार्य जारी है।
उन्होंने बताया कि रामगंगा में तेज बहाव से टूटे हरेवली बांध पर मरम्मत का काम चल रहा है। इस बांध के टूटने से दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 पानी में डूबा हुआ है। मुरादाबाद में हालात में पहले से थो़डा सुधार आया है। जिन रिहायशी इलाकों में तीन से चार फुट तक पानी भर गया था, वहां कोसी के जलस्तर में गिरावट आने से पानी का स्तर अब कम हो रहा है। मुरादाबाद के अपर जिलाधिकारी (वित्त) के. के. सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाके में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। उधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। राज्य के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के. के. सिन्हा की तरफ से जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब तक बाढ़ से 86 मौतें हुई हैं।  

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