नई दिल्ली/श्रीनगर/जम्मू। कश्मीर घाटी में तीन महीने से अधिक समय से बंद स्कूल और कॉलेज हिंसा के एक लम्बे दौर के बाद सोमवार को खुल गए लेकिन वहां छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ज्यादा नहीं रही।
कुछ जगहों पर मामूली पथराव की घटनाओं को छो़डकर सोमवार का दिन शांत रहा। घाटी के स्कूलों और कॉलेजों को खोले जाने का केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरन ने स्वागत किया है वहीं जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मीडिया को सलाह दी कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के खुलने की घटना को ज्यादा उजागर न करें। यद्यपि अलगाववादियों में खासतौर से कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी ने आम बंदी के दिन विद्यार्थियों के स्कूल जाने का विरोध किया है। गिलानी के विरोध कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को आम बंदी थी।
चिदम्बरम ने स्कूली बसों पर पथराव की कुछ वारदातों की निंदा करते हुए एक बयान में कहा, ""सरकार यह जानकर खुश है कि जम्मू एवं कश्मीर में ज्यादातर स्कूल और कॉलेज फिर से खुल गए हैं। ब़डी संख्या में छात्रों ने स्कूलों-कॉलेजों का रूख भी किया है। मैं कश्मीर के सभी वर्गो, विशेष तौर पर अभिभावकों से अपील करता हूं कि वे राज्य सरकार के साथ सहयोग करें ताकि स्कूल-कॉलेज सहीं ढंग से संचालित हो सकें।"" गृह मंत्रालय के अनुसार घाटी में कुछ जगहों पर स्कूली बसों पर पथराव किए गए। ये घटनाएं हबाक, बेमिना और नौगाम इलाकों में हुई। चिदम्बरम ने कहा, ""कोई अच्छी सोच वाला व्यक्ति स्कूल बसों पर पथराव कर सकता है। मैं उम्मीद करता हूं कि इस तरह की शरारत जल्द रूक जाएगी।"" अलगावादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेस ने लोगों से अपने बच्चाों को स्कूल न भेजने की अपील की थी। सोमवार को इसका असर भी दिखाई प़डा लेकिन स्कूल पहुंचने वाले छात्र उत्साहित नजर आए। यहां के एक प्रतिष्ठित स्कूल के छात्र मुदस्सिर (बदला हुआ नाम) ने कहा, ""मैं दो महीनों बाद स्कूल आया हूं। यह खुशी की बात है जिसे में अल्फाजों में बयां नहीं कर सकता। अगर हालात पूरी तरह से नहीं सुधारे तो मेरे मां-बाप शायद ही मुझे स्कूल भेजें।"" श्रीनगर के पुराना शहर इलाके के ज्यादातर स्कूलों में छात्रों की हाजिरी कम थी हालांकि शिक्षक और अन्य कर्मचारी स्कूल पहुंचे। स्कूलों को खोलने के लिए राज्य सरकार ने सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ""बच्चों को ले जा रही बसों को शहर में बिना रोक-टोक के गुजरने की इजाजत दी गई है। अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाले लोगों को पूरी आजादी के साथ आने-जाने की स्वीकृति दी गई है। स्कूलों में कर्मचारियों की उपस्थिति 100 फीसदी रही जबकि छात्रों का रूझान भी अच्छा रहा है।"" अभिभावकों का हालांकि कुछ और कहना है। एक अभिभावक ने कहा, ""शहर में कफ्र्यू लगाया गया है और बंद का आह्वान किया गया है। ऎसे में सभी बच्चों के स्कूल की ओर लौटने की उम्मीद कैसे की जा सकती हैक् "" इस बीच जम्मू में एक सरकारी कार्यक्रम के मौके पर मीडियाकर्मियों से बातचीत में मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा, ""आप सभी से मेरा निवेदन है कि घाटी में स्कूलों के खुलने की घटना को ज्यादा उजागर नहीं किया जाना चाहिए।"" क्योंकि उन्हें इस बात का भय है कि बच्चों को इससे दिक्कत हो सकती है। अब्दुल्ला ने कहा, ""इसे ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि बच्चाों की जिंदगी दांव पर है।"" अब्दुल्ला का बयान ऎसे समय में आया है, जब कुछ स्कूली बसों पर घाटी में कुछ स्थानों पर पथराव करने वालों ने हमला किया है। हालांकि पुलिस ने दावा किया है कि इलाके के स्थानीय निवासियों ने खुद उपद्रवियों को दौ़डाया और उन्हें वहां से भागने के लिए मजबूर होना प़डा। केंद्र सरकार की ओर से आठ सूत्री प्रस्ताव के ऎलान के बाद पहली बार घाटी में स्कूल खुले हैं। चिदम्बरम ने शनिवार को घाटी के लिए आठ सूत्री प्रस्ताव का ऎलान किया था। उन्होंने कहा था कि पथराव करने वाले युवकों को रिहा करने के साथ ही 11 जून के बाद की हिंसा में मारे लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रूपये दिए जाएंगे। घाटी में सुरक्षा बलों के साथ झ़्ाडप में लगभग 108 लोग मारे गए हैं।
भारत समाचार
कश्मीर में 3 माह बाद खुले स्कूल




















