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भारत समाचार

बदलेगा शेयर बेचने का तरीका

नई दिल्ली। सरकार सार्जजनिक क्षेत्र की बडी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने का तरीका बदलने पर विचार कर रही है। बडे संस्थागत निवेशकों को यह हिस्सा बेचने के लिए पब्लिक ऑफर के बजाय नीलमी का रास्ता अख्तियार किया जा सकता है।
दरअसर पिछले वित्त वर्ष में सामने आए कुछ भारी-भरकम फॉलोऑन ऑफर में आम निवेशकों के खास दिलचस्पी न लेने के बाद सरकार यह कदम उठाने के बारे में सोच रही है। पा्रइम डाटाबेस के पृथ्वी हल्दिया नेकहा कि भाव तय करने की आपनी आक्रमक रणनीति के कारण सरकार एनटीपीसी और एनएमडीसी में सार्वजनिक भागीदारी नहीं बढा सकी। संस्थागत निवेशकों के लिए सरकार को नीलामी का रास्ता चुनना चाहिए और इससे अलग आम निवेशकों के लिए 10-20 फीसदी डिस्कांउट के साथ फिक्स्ड प्राइस इश्यू लाना चाहिए। सरकार ने अभी तय नहीं किया है कि वह विशुद्ध रूप से नीलामी का राह पकडेगी या बुक-बिंल्डिग रूट अपनाएगी। नीलामी के तरीके में कंपनी अपने शेयरों के लिए एक न्यूनतक भाव तय करती है। सरकार उन कंपनियों के मामले में यह तरीका अपना सकता है। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपिनयों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 40,000 करोड रूपए जुटाने का लक्ष्य तय किया है। नीलामी की राह चुनने पर हो सकता है कि सरकार इस लक्ष्य से ज्यादा रकम हासिल कर ले। 2006 में सरकार ने मारूति में आठ प्रतिशत हिस्सा नीलामी के जरिए सफलता पूर्व बेचा था। मौजूदा माहौल में नीलामी का रास्ता ही सबसे अच्छा है।

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