नई दिल्ली, 6 सितंबर। भारत एक ओर जहां अपने पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की 125वीं जयंती मना रहा है वहीं उनके प्रशंसकों को लगता है कि आजादी की लडाई में उनके योगदान को भुला दिया गया है। पटना में स्कूली बच्चों के बीच हुई एक क्विज प्रतियोगिता में राजेंद्र बाबू की पौत्री तारा सिन्हा ने कहा कि उन्हें दुख है कि बच्चें देश के पहले राष्ट्रपति भारतरत्न राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर दिखाए जाने के बावजूद उन्हें पहचानने में असफल रहे। राजेंद्र बाबू के व्यक्तित्व पर किताब लिखने वाली तारा सिन्हा मानती हैं कि यह उनकी पीढी की असफलता है कि वे प्रसाद की उपलब्धियों के बारे में बच्चों को बता नहीं पाए। अपनी किताब के जारी होने के मौके पर हाल ही दिल्ली में मॉजूद तारा ने कहा, मुझे नहीं लगता की उनकी जयंती को जिस तरह से मनाया जाना चाहिए उस तरह से मनाया जा रहा है। उनके योगदान पर कोई प्रदर्शनी आयोजित नहीं की जा रही है। प्रतीकात्मक रूप से कोई डाक टिकट नहीं जारी किया जा रहा है।