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हाईकोर्ट का निर्देश : गरीबों का मुफ्त करे इलाज अपोलो

चीफ जस्टिस ओपी शाह और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने अपोलो अस्पताल की इस बात के लिए खिंचाई की कि वह गरीबों को मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं करा रहा है। एक स्वयंसेवी संगठन की 12 साल पुरानी याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि इन सालों में गरीबों को उनके इलाज के हक से अस्पताल ने वंचित रखा जबकि स्वास्थ्य हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और कोई भी इससे इनकार नहीं कर सकता।
इस मामले में कोर्ट की मदद कर रहे वकील मनिंदर आचार्य ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार ने अपोलो अस्पताल को इस शर्त पर कि वह सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए गरीबों को इलाज मुहैया कराएगा, केवल एक रूपए प्रति वर्गगज के हिसाब से जमीन दी थी। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने भवन निर्माण पर भी 16 करोड रूपए खर्च किए। अस्पताल ने पिछले साल 400 करोड रूपए का बडा मुनाफा कमाया और दिल्ली सरकार को भी इसमें हिस्सा मिला, मगर गरीबों के वार्ड को किसी तरह की मदद नहीं दी गई।
मनिंदर आचार्य की यह दलील सुनने के बाद अदालत ने कहा कि वक्त आ गया है कि औद्योगिक इकाइयां अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझे, मगर अस्पताल नियमों का पालन नहीं कर रहा जिससे कम दाम पर जमीन मुहैया कराने का मकसद ही समाप्त हो गया है। अदालत ने निर्देश दिया कि गोरीबों से ओपीडी, दवाई या अन्य किसी परीक्षण के लिए कोई भी पैसा नहीं लिया जाना चाहिए। साथ ही उसने सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर संदर्भ केंद्रों का गठन करे, जो गरीबों की पहचान करके उन्हें अपोलो अस्पताल भेजेंगे।




















