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भारत का सीटीबीटी पर हस्ताक्षर से इनकार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने परमाणु निशस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है। अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 15 सदस्यी सुरक्षा परिषद के इस विशेष सम्मेलन की अघ्यक्षता की थी। उन्होंने प्रस्ताव 1887 के तहत उन सभी देशों से परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है, जिन्होंने अभी तक इस संधि को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जटिल मामला है, क्योंकि देशों के बीच अविस्वास के स्तर बहुत ज्यादा है, फिर भी यह किया जाना बहुत जरूरी है।
भारत ने तुरंत इसका विरोध करते हुए अपनी स्थिति साफ कर दी। भारतीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने कहा कि लंबे समय से हमारी यह नीति रही है कि पूरी दुनिया से परमाणु हथियार खत्म किए जाएं। हम ऎसी किसी संधि को स्वीकार नहीं कर सकते जिसके तहत कुछ देशों को ऎसे हथियार मिलने की इजाजत मिलती हो। भारत का तर्क है कि विकसित देशों ने पहले ही परमाणु हथियारों को जखीरा बना लिया है और अब बाकी देशों पर अप्रसार संधि थोप रहे हैं। इस प्रस्ताव का रूस और चीन सहित सुरक्षा परिषद के सभी स्थाई सदस्यों ने समर्थन किया जबकि सीटीबीटी पर हस्ताक्षर का विरोध करने वाले भारत समेत आठ देश शामिल हैं।




















