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भारत समाचार

कोर्ट के बजाय गुंडों पर बढ़ने लगा भरोसा : जज

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट जज ने कहा है कि अपने विवादों को निपटाने के लिए लोग न्याय प्रणाली से ज्यादा स्थानीय गुंडों पर भरोसा करने लगे हैं। इसके लिए मुकदमें निपटारे में देरी और अनिश्चितता को जिम्मेदार माना जा सकता है। जस्टिस आरवी रवींद्रन ने कहा, जब केस के नतीजे के बारे में तीस साल तक कुछ नहीं हो, तो कोई मुकदमा करना ही क्यों चाहेगा। ऎसी परिस्थितियों में पी़डत पक्ष गुंडों को सहारा ले लेता है, क्योंकि उनके पास तुरंत निपटारा होता है। जस्टिस रवींद्रन ने दिल्ली में रोहिणी कोर्ट परिसर में सोमवार को मध्यस्थता केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर कानून पेशे से जु़डे लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, यह अनिश्चितता इस मायने में होती है कि कोई अगर निचली अदालत में मुकदमा जीत या हार जाए तो भी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में नतीजा बदल सकता है। उन्होंने दीवानी और फौजदारी मुकदमों के अनुपात में असंतुलन पर भी चिंता जताई और कहा कि अब समय आ गया है जब कानून पेशे से जु़डे लोग इस दिशा में काम करें। उन्होंने कहा, 58 साल पहले दीवानी और फौजदारी मुकदमों का अनुपात 50:50 था, जो अब यह 20:80 हो गया है।
ऎसे में वह समय दूर नहीं जब अदालतों के पास फौजदारी मुकदमे ही रह जाएंगे। जस्टिस रवींद्रन ने कहा, इसका मतलब होगा लोगों का न्याय प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ जाना। उन्होंने कहा कि विवादों को सुलझाने में मध्यस्थता काफी कारगर है, इससे विवाद से जु़डे पक्ष और वकीलों, दोनों को फायदा होता है।

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