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भारत समाचार

नहीं रूक रही महंगाई की मार

नई दिल्ली। कम बारिश के कारण कृषि उत्पादन पर असर के कारण खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्य पर आधारित मुद्रा स्फीति की दर 21 नवंबर को समाप्त सप्ताह में उछलकर 17.47 फीसदी पर पहुंच गई। इससे पिछले सप्ताह महंगाई दर 15.58 फीसदी थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति के बढते दबाव को देखते हुए सरकार और रिजर्व बैंक के लिए महंगाई पर लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया हैं, वरना कारखाना उत्पादों की महंगाई भी बढने लगेगी।
गुरूवार को जारी सरकारी आंकडों के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में प्याज के दाम 12 फीसदी से अधिक बढे हैं, जबकि वार्षिक आधार पर इसमें 30.89 फीसदी की वृद्धि हुई। इसी प्रकार, सालाना आधार पर चावल और गेंहू के दाम 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। बहरहाल, वाçष्ाüक आधार पर आलू की कीमत में 94.17 फीसदी की कमी आई हैं। पिछले सप्ताह इसकी कीमत में लगभग 100 फीसदी की बढोतरी हुई थीं। सप्ताह के दौरान कपास, सब्जियों जैसी प्राथमिक वस्तुओं की कीमत 12.53 फीसदी तक बढी। पिछले सप्ताह इसमें 11.04 फीसदी की बढोतरी हुई थीं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने यहां कहा, "खाद्य वस्तुओ पर आधारित मुद्रास्फीति को निश्चित रूप से कम किया जाना चाहिए। ऎसा नहीं होने पर कारखाना क्षेत्र की वस्तुएं महंगे होने लगेंगी। इसके लिए रिजर्व बैंक द्वारा विशेष रूप से मुद्रा आपूर्ति के संबंध में मौद्रिक पहल की जरूरत होगी।"

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