नई दिल्ली। पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री शांति भूषण ने गुरूवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि देश के 16 प्रधान न्यायाधीशों में से कम से कम आठ "निश्चित रूप से भ्रष्ट" थे।
वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने गुरूवार को दायर किए हलफनामे में कहा कि छह प्रधान न्यायाधीश "निश्चित रूप से ईमानदार" थे। उन्होंने कहा कि वह शेष दो न्यायाधीशों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। शांति भूषण ने सीलबंद लिफाफे में भ्रष्ट और ईमानदार प्रधान न्यायाधीशों की पहचान का खुलासा किया है। यह हलफनामा उन्होंने वकील बेटे प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना की सुनवाई कर रहे न्यायाधीशों के विचार के लिए दाखिल किया है। शांति भूषण के बेटे प्रशांत भूषण को एक मामले में अवमानना का सामना करना प़ड रहा है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि प्रधान न्यायाधीश एस.एच. कपाç़डया ने वन खंडपीठ में शामिल होकर न्यायिक अनुचित व्यवहार किया है। वन खंडपीठ ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज से जु़डे मामले की सुनवाई की थी। प्रशांत भूषण ने यह बात एक साक्षात्कार में कही थी और उस वक्त कपाç़डया सर्वोच्चा न्यायालय में वरिष्ठ न्यायाधीश थे। शांति भूषण ने अपने हलफनामे में कहा कि चूंकि यह बात वह सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं इसलिए उन्हें अदालत की अवमानना का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। शांति भूषण ने कहा कि इस अवमानना के लिए उन्हें उचित सजा मिलनी चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सजा मिलने पर जेल में बिताए दिनों को वह सम्मान की तरह लेंगे। उन्होंने कहा कि इसे मैं देशवासियों को ईमानदार और स्वच्छ न्यायिक प्रक्रिया उलपब्ध कराने की दिशा में एक कोशिश समझूंगा। शांति भूषण ने कहा कि चूंकि इस मामले में उठे सवाल पूरी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं इसलिए इस याचिका पर पूरी अदालत द्वारा फैसला सुनाया जाना चाहिए न कि प्रधान न्यायाधीश द्वारा चुने गए तीन न्यायाधीशों द्वारा। शांति भूषण ने अपने हलफनामे में जिन 16 न्यायाधीशों का जिक्र किया है उनमें न्यायाधीश रंगनाथ मिश्रा, न्यायाधीश के. एन. सिंह, न्यायाधीश एम.एच. केना, न्यायाधीश एल.एम. शर्मा, न्यायाधीश एम.एन. वैंकटचल्लैया, न्यायाधीश ए. एम. अहमदी, न्यायाधीश जे. एस. वर्मा, न्यायाधीश एम.एम. पंछी, न्यायाधीश ए.एस. आनंद, न्यायाधीश एस.पी. बरूचा, न्यायाधीश बी.एन. किरपाल, न्यायाधीश जी.बी. पाठक, न्यायाधीश राजेंद्र बाबू, न्यायाधीश आर.सी. लाहोटी, न्यायाधीश वी.एन. खरे और न्यायाधीश वाई.के. सभरवाल शामिल हैं। शांति भूषण ने अपने हलफनामे में कहा है कि दो पूर्व प्रधान न्यायाधीशों ने उनसे व्यक्तिगत तौर पर कहा था कि उनके ठीक पहले और ठीक बाद के न्यायाधीश भ्रष्ट थे।
उन्होंने कहा है कि उन चार प्रधान न्यायाधीशों के नाम आठ भ्रष्ट न्यायाधीशों की सूची में शामिल किए गए हैं। शांति भूषण ने कहा कि एक समय था जब हम उच्चा न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के भ्रष्ट होने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में स्थिति काफी बदल गई है। हालत यह है कि प्रधान न्यायाधीश ने खुद स्वीकार किया है कि 20 फीसदी न्यायाधीश भ्रष्ट हो सकते हैं। उन्होंने अपने हलफनामे में गुजरात उच्चा न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस.जे. मुखोपाध्याय की टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था ""हमारे न्याय तंत्र में किसी को भी खरीदा जा सकता है।"" शांति भूषण ने कहा कि इसके बावजूद देश में बहुत ब़डी संख्या में ईमानदार न्यायाधीश हैं।
भारत समाचार
देश के 8 प्रधान न्यायाधीश भ्रष्ट थे : पूर्व कानून मंत्री





















