भारत समाचार
सागर की तरह ही गहरे थे रामानंद सागर

रामायण देखने के लिए आलम यह होता था कि लोग रविवार की सुबह का बडी बेसब्री से इंतजार करते थे और एक..एक टेलीविजन सेट पर गांव..मुहल्ले के लोगों का हुजूम उमड पडता था। बस और ट्रकों के ड्राइवर अपने वाहनों को ब्रेक लगाकर रामायण देखने के लिए किसी ढाबे में लगे टेलीविजन से चिपक जाते थे।
फिल्म समीक्षक रामकिशोर पारचा का कहना है कि रामानंद सागर छोटे पर्दे के क्षेत्र में अपने पीछे एक ऎसा करियर छोड गए है जो किसी विरले को ही नसीब होता हैं। प्रतिभा के मामले में वह सागर की तरह ही गहरे और विशाल थे। रामानंद सागर का जन्म लाहौर के नजदीक असल गुरू नामक स्थान पर 29 दिसंबर 1927 को एक धनाढ्य परिवार में हुआ था।




















