कोई परिणाम नहीं मिला

No Result Found

भारत समाचार

कश्मीर पर आज सर्वदलीय बैठक करेगी विचार

नई दिल्ली। कश्मीर में बिग़डते हालात पर बुधवार को सर्वदलीय बैठक होने जा रही है। कश्मीर में सुरक्षाबलों को मिले विशेषाधिकार पर मंत्रिमंडलीय समिति में कोई फैसला नहीं हो पाने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वहां की स्थिति पर विचार करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
बैठक में खास तौर पर इस बात पर चर्चा होगी कि कश्मीर की मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए किस तरह के कदम उठाए जाएं और वहां बातचीत की प्रक्रिया को किस तरह से आगे बढ़ाया जाए। इस दौरान कश्मीर घाटी में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकारल कानून को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाने पर भी विचार होगा, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और अलगाववादी नेता इसकी बराबर मांग कर रहे हैं।
केंद्रीय कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की सोमवार को हुई बैठक में सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय किया गया था। इस बैठक में उन सभी पार्टियों को आमंत्रित किया गया है जिनके प्रतिनिधि संसद में मौजूद हैं। इस बैठक का सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है, लेकिन कश्मीर को लेकर उनके मतभेद कायम हैं, और यह बैठक से पहले ही सार्वजनिक रूप से सामने आ गए हैं।
जम्मू-कश्मीर की विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि सर्वदलीय बैठक तो ठीक है, लेकिन अगर इसमें सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (एएएफएसपीए: में कटौती जैसे सतही निर्णय लिए जाते हैं, तो इसका कोई फायदा नहीं है। उनका कहना है कि ऎसे छोटे कदमों पर कश्मीर की समस्या के हल की दिशा में कोई सहायता नहीं मिलेगी। जबकि दूसरी ओर केंद्र में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा है कि राज्य में सरकार नाम की कोई चीज नहीं बची है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जो भी हो रहा है, उसके लिए राज्य ही नहीं, केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है।
उनका कहना है, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को स्थिति का अंदाजा ही नहीं है और वह कोई भी निर्णय लेने में सक्षम नहीं है, जिससे हर रोज हमारी इस आशंका को बल मिल रहा है कि वह पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों के सामने घुटने टेक रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर राज्य में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून के असर को कम किया गया या हटाया गया, तो उसके परिणाम ठीक नहीं होंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन राव भागवत ने इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकार को अ़ाडे हाथों लिया और स्वायत्तता जैसे मुद्दों को सिरे से खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही प्रधानमंत्री ने समस्या का समाधान निकालने के एक विकल्प के तौर पर स्वायत्तता का प्रस्ताव दिया था, इस पर राजनीतिक पार्टियों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आई थी। उधर, सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के अधिकारों को कम करने या हटाने की आशंका पर एयर मार्शल पीवी नाइक ने कहा कि इस अधिनियम का असर कम किए जाने की स्थिति में सुरक्षाबलों को कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिए। केंद्र की संप्रग सरकार के अंदर पिछले कई दिनों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन सरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
हालांकि सरकार की ओर से दी गई सफाई में कहा गया कि कैबिनेट में कोई मतभेद नहीं है, मगर बराबर खबरें आ रही हैं कि इसे लेकर कैबिनेट ही बंटा हुआ है। सरकार के इस कदम में सेना भी फांस बनी हुई है। वह भी नहीं चाहती कि कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऎसा कोई कदम उठाया जाए। दूसरी ओर भाजपा कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस्तीफे की मांग कर रही है। राज्य की स्थिति की वजह से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की राजनीतिक स्थिति बेहद नाजुक है और मंगलवार को यह चर्चा थी कि वह किसी भी वक्त इस्तीफे की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने इसका खंडन किया है। कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रहे उमर अब्दुल्ला दो दिन पहले ही संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम से मिलकर लौटे हैं।

अन्य खबरें

ये भी पढ़ें

अन्य खबरें