अयोध्या। इलाहबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ लंबित प़डे बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद पर गुरूवार को अपना फैसला सुनाने जा रही है। ऎसे में उत्तर प्रदेश के इस शहर के निवासियों का कहना है कि इस विवाद में एक सौहार्दपूर्ण समझौता होना चाहिए। एक सेवानिवृत्त शिक्षक अश्विनी सिंह ने आईएएनएस से कहा, ""फैसला जरूरी है क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया का अंत होगा लेकिन साम्प्रदायिक सौहार्द तभी कायम हो सकता है जब हिंदू और मुसलमान एक सौहार्दपूर्ण समझौते पर पहुंचें।"" उन्होंने कहा कि विवाद को निपटाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसमें सुलह हो जाए। केंद्र और राज्य सरकारों को इस विवाद में सौहार्दपूर्ण समझौते की पहल के लिए हिंदू और मुस्लिम धर्म गुरूओं को नियुक्त करना चाहिए। सिंह ने कहा कि सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि यह समझौता बंद कमरों में न होकर विवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित अयोध्या के लोगों के सामने हो। मोबाइल फोन की एक दुकान के मालिक एन.ए. ईमामुद्दीन कहते हैं, ""इस फैसले के बारे में सबसे अच्छी बात यह होगी कि आम आदमी राष्ट्रीय मुद्दा बने इस संवेदनशील मामले के तकनीकी व अन्य पहलुओं को जान सकेगा।"" उन्होंने कहा कि वैसे हम जानते हैं कि इस फैसले के बाद इस मामले के सर्वोच्चा न्यायालय में जाने की संभावना है जहां किसी निर्णय के आने तक एक बार फिर लम्बी कानूनी ल़डाई चलेगी। उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों को इस मामले में एक सौहार्दपूर्ण निर्णय पर पहुंचना चाहिए। इससे न केवल इस विवाद का अंत होगा बल्कि हिंदू और मुसलमानों के बीच संबंध भी अच्छे बने रहेंगे। इलाहबाद उच्चा न्यायालय की लखनऊ पीठ गुरूवार दोपहर 3.30 बजे इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी।
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अयोध्या विवाद : सौहार्दपूर्ण समझौता जरूरी





















