पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण की अधिसूचना जारी होने के साथ ही डेढ़ माह तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया तो प्रारंभ हो गई। परंतु प्रथम चरण और दूसरे चरण के प्रत्याशियों के लिए "पितृपक्ष" परेशानी का सबब साबित हो रहा है।
हिन्दु मान्यता के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष के प्रारंभ होते ही पितृपक्ष भी प्रारंभ हो जाता है जिसमें कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिये। एक तरफ जहां पितृपक्ष सात अक्टूबर तक है वहीं प्रथम चरण और द्वितीय चरण में होने वाले चुनाव के लिए प्रत्याशियों का नामांकन भी इसी दौरान भरा जाना है। ऎसे में प्रत्याशियों के लिए परेशानी हो गई है। अब पितृ पक्ष की वजह से नेता नामांकन दाखिल करने की तिथि के लिए ज्योतिषियों का चक्कर लगाकर शुभ मुहूर्त जानने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रत्याशी ज्यातिषियों शुभ मुहूर्त से पूछ रहे हैं, आखिर चुनाव का मामला जो ठहरा। ज्योतिषाचार्य पंडित जय कुमार पाठक बताते हैं कि पूर्वजों के पिण्डदान की तिथि (जिस तिथि को उनका स्वर्गवास हुआ हो) उस दिन नामंाकन करना शुभ नहीं माना जायेगा। वे कहते हैं कि प्रत्याशियों की जन्मपत्री के अनुसार भी उनके लिए पितृपक्ष में शुभ तिथि देखी जा सकती है। वे कहते हैं कि उनके पास भी कई प्रत्याशी शुभ मुहूर्त जानने पहुंच चुके हैं। उनका मानना है कि आश्विन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में है इस कारण यह समय सभी लोगों के लिए शुभ माना जाता है। इधर, कई प्रत्याशी पंडित से " गणेश मंत्र " का जाप भी करा रहे हैं।
पूर्णिया जिला के रूपौली और बनमनखी के कई भावी प्रत्याशी कई पंडितों से मिलकर जाप करा रहे हैं। जबकि कुछ भावी प्रत्याशी इसे अंधविश्वास भी मानते हैं। गायघाट के विधायक महेश्वर प्रसाद यादव तिथियों पर विश्वास नहीं करते। वे कहते हैं कि जिस दिन उनके कार्यकर्ता तय कर देंगे और जिस दिन उन्हें सहूलियत हेागी उसी दिन नामांकन भरेंगे। सबसे ज्यादा परेशानी उन नेताओं की है जो दल बदल कर दूसरी पार्टियों का टिकट लेने की फिराक में हैं। ऎसे लोगों का कहना है कि एक तो टिकट ही विकट है उस पर ये पितृपक्ष! आखिर पितृपक्ष में चुनावी वैतरणी कैसे पार होगी।
भारत समाचार
बिहार में प्रत्याशियों के लिए पितृपक्ष बना परेशानी का सबब





















