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भारत समाचार

दिल्ली की गलियों से भिखारी नदारद

नई दिल्ली। इस समय दिल्ली की गलियों में आप भिखारियों को तुरंत नहीं तलाश पाएंगे। शहर चूंकि राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में है, इसलिए जो लोग भीख मांगते हैं या कोई छोटी-मोटी चीजें बेचते हैं, वे दिल्ली में खुद को गैर जरूरी महसूस कर रहे हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों के शुभंकर शेरा कह रहा है, ""हमारा शहर, हमारे लोग"" लेकिन वहीं दक्षिणी दिल्ली में पेंसिल बेचने वाली एक छोटी बच्ची रानी ने कहा, ""वे (पुलिस) कहते हैं कि राजधानी में विदेशी आ रहे हैं, लिहाजा हमें एक महीने तक दूर रहना होगा। मुझे लगता है कि कोई ब़डा समारोह होने वाला है।""
रानी ने एक युगल को पेंसिल खरीदने के लिए मनाते हुए मुस्करा कर कहा, ""लेकिन मैं जल्द ही अपने दोस्तों के साथ लौट आऊंगी।"" अगर समाज कल्याण विभाग के आंक़डों पर विश्वास किया जाए तो दिल्ली में तकरीबन 60,000 भिखारी हैं। इनमें 30 फीसदी 18 वर्ष से कम उम्र के हैं। वहीं गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि इनकी तादाद 100,000 से ऊपर है। समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ""सरकार शहर को भिखारी मुक्त देखना चाहती है। अगर भिखारी स़डकों पर पैसा मांगता है तो आप दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।"" राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान 7,000 खिलाडियों और प्रतिनिधियों एवं हजारों पर्यटकों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है।

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