नई दिल्ली। बॉलीवुड में संगीत की प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन अपनी नई फिल्मों में सही भावनाओं को प्रेषित करने के लिए संजयलीला भंसाली और रामगोपाल वर्मा जैसे निर्देशकों ने यह काम संभाला। भंसाली ने जहां "गुजारिश" में संगीत दिया है तो वर्मा ने "रक्तचरित्र" का एक गीत गुनगुनाया है।
भंसाली कहते हैं, ""फिल्म में मेरे संगीत देने के पीछे का मकसद यह रहा कि मुझे लगा कि मैं जितनी अच्छी तरह से किरदारों को समझता हूं और साथ ही यह समझता हूं कि उन्हें संगीत में अपने भावों को किस तरह से प्रेषित करना है, उतना कोई दूसरा संगीतकार नहीं समझ सकता। मेरे मन में कुछ गहरे विचार थे, इसलिए मैं जो थो़डा-बहुत संगीत जानता था उसके आधार पर यह प्रयोग किया है। वैसे मैंने जो किया है उसे लेकर मैं खुश हूं।"" वर्मा ने "रक्तचरित्र" के तेलुगू संस्करण का "कुट्टुलाटो" शीर्षक गीत गाया है। वह कहते हैं कि जब उनकी फिल्म के संगीतकारों को इस गीत के लिए सही आवाज नहीं मिली तो उनसे यह गीत गाने के लिए कहा गया।
वर्मा ने फेसबुक पर लिखा है, ""मेरे गाने के पीछे यह मकसद नहीं था कि मैं अपनी गायन प्रतिभा दिखाना चाहता हूं। जब मैं संगीत निर्देशकों को यह बता रहा था कि गीत किस तरह का होना चाहिए तो वे मेरे दखल से तंग आ गए थे और उन्होंने मुझ पर यह गीत गाने के लिए दबाव बनाया।"" निर्देशक शिरीष कुंदर ने भी अपनी पत्नी व निर्देशिका फरहा खान की फिल्म "तीस मार खां" के शीर्षक गीत का संगीत तैयार किया है। कुंदर ने इस फिल्म की पटकथा भी लिखी है। कुंदर ने बताया कि वह एडिटिंग और निर्देशन के क्षेत्र में आने से पहले संगीत व नृत्य निर्देशन करते रहे हैं और उन्होंने अपनी फिल्म "जान-ए-मन" का बैकग्राउंड संगीत भी तैयार किया था। वह कहते हैं कि इस गीत के लिए संगीत देना उनके लिए सामान्य बात है।
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भंसाली ने संगीत रचा, वर्मा गुनगुनाए





















