छिंदव़ाडा। मध्य प्रदेश के छिंदव़ाडा जिले के पांढुर्ना में लगने वाले गोठमार मेले में इज्जत की ल़डाई में एक बार फिर पत्थरों की बरसात हुई। पत्थरों के इस युद्घ में 15 लोगों को चोटें आई हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलेामीटर की दूरी पर महाराष्ट्र की सीमा पर जाम नदी के तट पर चंडी माता के मंदिर के करीब गोठमार मेला लगता है। दुनिया में यह अपनी तरह का अनोखा मेला है। इस मेले में होने वाली पत्थरबाजी में हर साल अनेक लोग घायल होते है और अब तक कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। किंवदंती है कि जाम नदी के तट पर स्थित एक गांव के एक युवक का प़डोसी गांव की युवती से प्रेम हो गया था और वह उसे अपने साथ भगा कर ले जा रहा था। युवती के गांव वालों ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जो़डकर दोंनो पर पत्थरों से हमला बोल दिया, वहीं युवक के गांव वाले उसके बचाव में आ गए। दोनों ओर से जमकर पत्थर बाजी हुई और कई लोगों ने खून बहाया। तभी से यह मेला लगता आ रहा है। लोग मेले के बीचों-बीच एक लक़डी बांधकर उसे पत्थरों से निशाना बनाते हैं। प्रशासन ने गुरूवार को लगे इस मेले में पत्थरबाजी रोकने के पर्याप्त इंतजाम किए मगर ये उपाय ज्यादा कारगर नहीं हुए। जाम नदी के दोनों ओर लोगों की भी़ड जमा हुई और पत्थरों के चलने का सिलसिला शुरू हो गया। पांढुर्ना के अनुविभागीय अधिकारी आई. जे. खलको के मुताबिक पत्थरबाजी में कुल 15 लोगों को चोटें आई हैं। गंभीर रूप से कोई घायल नहीं हुआ है। पूर्व में जिला प्रशासन ने हादसों को रोकने के लिए पत्थर के स्थान पर रबर की गेंदें उपलब्ध कराई थीं मगर यह कोशिश भी नाकाम रही थी। इतना ही नहीं पिछले साल मानवाधिकार की सख्ती के चलते जिला प्रशासन ने भी खास एहतियात बरती थी। इस बार भी प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती की और घु़डसवार दस्ता भी तैनात किया गया था। इसके बावजूद पत्थरबाजी नहीं रूक पाई। मान्यता के मुताबिक गोठमार मेले में घायल होने को लोग अपना सौभाग्य मानते हैं और इसी के चलते इस मेले में आने वाला हर व्यक्ति पत्थर बाजी में हिस्सा लेने से नहीं चूकता।
भारत समाचार
गोठमार मेले में पत्थरों की बरसात, 15 घायल





















