अबू धाबी। अबू धाबी फिल्म महोत्सव में एक बार फिर भारत ही छाया रहा। यहां ब्रिटिश फिल्मकार किम लांगिनोट्टो की फिल्म "पिंक स़ाडीज" का प्रदर्शन हुआ।
इस फिल्म में उत्तर भारत में फैली बाल विवाह और जाति आधारित बुराइयों को उभारा गया है और साथ ही इसमें बदलाव के लिए एक महिला के संघर्ष को दिखाया गया है। उत्तर प्रदेश में फिल्माई गई इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से लोग अपनी ल़डकियों की शादी कम उम्र में ही कर देते हैं और किस तरह उनके ससुराल वाले ल़डकियों को तंग करते हैं, उनके पति उन पर शारीरिक अत्याचार करते हैं और कभी-कभी तो उनके ससुर तक उनके साथ दुष्कर्म करते हैं। फिल्म दिखाती है कि किस तरह से जाति व्यवस्था प्रेमियों के लिए अ़डचन बन जाती है। उत्तर प्रदेश के बांदा के अटारा के नजदीक इसकी शूटिंग हुई है। फिल्मकार लांगिनोट्टो कहती हैं कि इस फिल्म को बनाने के पीछे का उनका मकसद इन समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना था न कि पुरस्कार या पैसा प्राप्त करना। चैनल 4 ने 170,000 पाउंड की लागत से इस फिल्म का निर्माण किया है। फिल्म की कहानी बांदा जिले में एक महिला निगरानी समूह "गुलाबी गैंग" बनाने वाले 50 वर्षीय सम्पत पाल के इर्द-गिर्द घूमती है। सम्पत बाल विवाह की शिकार होती है जो अपने ससुराल वालों के खराब व्यवहार के चलते गांव छो़ड देती है और अनूठे ढंग से महिलाओं की स्वतंत्रता की ल़डाई ल़डती है। फिल्म बताती है कि भारत में बाल विवाह पर रोक होने के बावजूद किस तरह से ये शादियां हो रही हैं। लांगिनोट्टो कहती हैं कि वह गोवा के भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में भी इस फिल्म को दिखाना चाहती हैं और इसमें काम करने वाली सभी महिलाओं को वहां ले जाना चाहती हैं।





















