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भारत समाचार

कोई मिट्ठन लाल से सीखे जीने की उमंग !

मुजफ्फनगर। बुढ़ापे की अवस्था में जीवन को नए रंग देना कोई मिट्ठन लाल अरो़डा से सीखे। डिप्टी कलेक्टर की नौकरी से रिटायर्ड हुए अरो़डा आज युवा पीढ़ी और समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं। नौकरी के बाद का समय समाज के साथ व्यतीत करने के लिए उन्होंने अपना जीवन पर्यावरण और समाज से जो़डा है। मुजफ्फरनगर के ब्रrापुरी क्षेत्र के अरो़डा `ार्टर में रहने वाले मिट्ठन लाल अरो़डा 1991 में डिप्टी कलेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। नौकरी समाप्त होने व बढ़ती आयु को उन्होंने कभी भी अपने पर हावी नहीं होने दिया क्योंकि उनका मानना था कि उत्साह व उमंग विचारों से उत्पन्न होते हैं।
उन्होंने इसीलिए समाज सेवा, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना शेष जीवन लगाने की शपथ ली। पिछले कई वर्षो से वे अपनी पेंशन के खर्च से ही मुजफ्फरनगर शहर के सरकारी कार्यालयों, कचहरी परिसर, पार्को, स्कूल व कॉलेजों, अस्पताल तथा विभिन्न चौराहों व स़डकों पर 442 से भी अधिक छायादार, फलदार व फूलदार वृक्ष लगाकर उनका संरक्षण कर रहे हैं। अरोरा इन वृक्षों में प्रतिदिन घूम-घूमकर पानी देते हैं और उनकी साफ-सफाई करते हैं।
उन्होंने जनता की सेवा के लिए कलेक्टर परिसर में एक हैण्डपम्प के साथ सिमेंट की एक बैंच का निर्माण कराया। इसके अतिरिक्त वह सैक़डों मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित करते रहते हैं। पेंशनर्स की विधवाओं व अन्य गरीब विधवाओं को ब़डी संख्या में अपने पास से सिलाई मशीन दे चुके हैं। मंद बुद्घि विद्यालय के 80 निर्धन छात्रों को वार्षिक सहायता, नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड संस्था को अपनी पेंशन से आर्थिक सहायता देते रहते हैं। अपना समय सकारात्मक रूप से बिताने के लिए वह साहित्य सेवा भी करते हैं।
उन्हें समाज, साहित्य और पर्यावरण सेवा के लिए गोण्डा में धरती रत्न, बहराइच में साहित्यश्री सहित विभिन्न सम्मान मिल चुके हैं। वह युवाओं को प्रत्येक दिन पर्यावरण संरक्षण व आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा देते हैं और शहर के बच्चों में उत्साह व मेहनत जगाने के लिए खुद प्रतिदिन सैंक़डों बच्चों को चिटि्ठयां लिखते हैं। कोई बच्चा बुलंदियों पर पहुंचता है तो सबसे पहले मिट्ठन लाल अंकल का फोन या चिट्ठी बच्चे के पास पहुंचता है।
मिट्ठन लाल ने आईएएनएस को बताया, ""मनुष्य जीवन में मानव कल्याण सबसे ब़डी भक्ति है। नई पीढ़ी अच्छे संस्कार, सामाजिक सरोकार सीखे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सचेत रहे, यही मेरा लक्ष्य है और सेवानिवृत्ति के बाद भी लोग थकान महसूस न करें। क्योंकि पीढ़ी सुधार का काम उन्हीं का है।""

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