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भारत समाचार

हिमाचल में लगातार बारिश, दिल्ली व बिहार में स्थिति में सुधार

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण भाख़्ाडा एवं ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के अधीन आने वाले बांधों से हजारों क्यूसेक पानी छो़डा गया है। इसके चलते सतलुज सहित सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

गुरूवार को भाख़डा बांध से 12,000 क्यूसेक से अधिक पानी छो़डा। इसके चलते सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ गया है। बीबीएमबी के अधिकारियों ने दावा किया है कि छो़डे गए पानी की वजह से पंजाब के रोप़ड जिले के आनंदपुर साहिब उप मंडल से सटे गांवों में बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। बीबीएमबी के संयुक्त निदेशक वी. पी. शर्मा ने गुरूवार को बताया, ""भाख़डा बांध में फिलहाल 1681.5 फुट पानी है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 1680 फुट तक की है।"" सतलुज नदी में पानी छो़डे जाने के कारण रोप़ड जिले के आनंदपुर साहिब और किरतपुर साहिब में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है हिमाचल प्रदेश में एक अन्य ऊपरी बांध से पानी छो़डे जाने के बाद पोंग बांध में जलस्तर फिर से बढ़ने की संभावना है, हालांकि बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। बीबीएमबी के अधिकारी के. सी. राणा ने फोन पर बताया, ""बांध में गुरूवार सुबह पानी का बहाव सामान्य (14,500 क्यूसेक) था। लेकिन बुधवार रात पंदोह बांध से अतिरिक्त पानी छो़डे जाने के बाद यहां प्रवाह 25,000 क्यूसेक तक बढ़ सकता है।"" हिमाचल प्रदेश मौसम कार्यालय के निदेशक मनमोहन सिंह ने आईएएनएस को बताया, ""राज्य में कई जगहों पर अभी बारिश हो सकती है।""

राज्य में बुधवार से गुरूवार सुबह 8.30 बजे तक 84.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। भारी बारिश की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-21 और 22 पर यातायात बाधित हुआ है। इन राजमार्गो पर शिमला, किन्नौर, मंडी और कुल्लू जिलों में भू-स्खलन हुआ है। किन्नौर जिले के संगला घाटी में 80 से अधिक पर्यटक फंसे हुए हैं। इनमें कई विदेशी भी हैं। जिले की उपायुक्त ममता चौधरी ने बताया, ""कोलकाता के 50, फ्रांस के पांच, जर्मनी के 11 और शेष पर्यटक देश के दूसरे हिस्सों के हैं।""

इधर दिल्ली में युमना का जलस्तर गुरूवार सुबह कम होना शुरू हो गया लेकिन जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से लगभग दो मीटर ऊपर बना हुआ है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बुधवार रात को युमना का जलस्तर 207.08 तक पहुंच गया था। यमुना का जलस्तर गुरूवार सुबह 206.91 मीटर रिकॉर्ड किया गया जो खतरे के निशान 204.83 मीटर से 2.08 मीटर ऊपर है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ""सुबह से ही हरियाणा की तरफ से पानी का ज्यादा प्रवाह नहीं देखा गया है। सुबह 6 बजे हथिनिकुंड बैराज से 303,169 क्यूसेक पानी छो़डा गया जो शनिवार तक दिल्ली पहुंचेगा।"" अधिकारी के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है और चिंता करने की जुरूरत नहीं है क्योंकि जलस्तर कम हो रहा है। दिल्ली के जीटीबी नगर, मुखर्जीनगर, दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस, कश्मीरी गेट अंतर्राज्यीय बसअड्डे पर लगभग दो फुट तक पानी भर गया है। नया उस्मानपुर, सरिता विहार, कालिंदी कुंज, जामिया नगर और वजीराबाद में मंगलवार को पानी भर गया जिससे लोगों को अस्थाई राहत शिविरों में शरण लेनी प़डी। हरियाणा में यमुना नदी पर बने एक तटबंध के टूट जाने के कारण यमुनानगर जिले के कई निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक जिला प्रशासन के अलावा सेना बांध में आई दरार को बंद करने में जुटी हुई है। यमुनानगर के उपायुक्त अशोक सांगवान ने बुधवार को बताया, ""तटबंध में आए नए दरार को बंद करने के प्रयास जारी हैं और उसे जल्द ही बंद कर लिया जाएगा। बाढ़ प्रभावित गावों से पानी कम होना शुरू हो गया है।"" यमुनानगर जिला प्रशासन के मुताबिक गुरूवार को कुछ महत्वपूर्ण स़डकों के बाढ़ के पानी में डूब जाने से यातायात प्रभावित हुआ है। हथिनिकुंड बैराज से 200,000 क्यूसेक से अधिक पानी गुरूवार सुबह छो़डा गया। उत्तर प्रदेश के पश्विमी हिस्से में बाढ़ की स्थिति और भयावह होती जा रही है। कई जिलों में राहत एवं बचाव कार्य में मदद के लिए सेना को बुलाया गया है। बाढ़ से अब तक पांच लाख हेक्टेयर से अधिक की फसल बर्बाद हो गई है और लगभग 11,000 मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। राज्य में बाढ़ से सबसे अधिक 12 जिले प्रभावित हुए हैं जिनमें प्रमुख रूप से मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, फर्रूखाबाद, हरदोई, शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी शामिल है। इन जिलों में बाढ़ से अब तक 87 लोग मर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी 10 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है और इनमें मोबाइल टीमें गठित की गई हैं। बाढ़ के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश रोडवेज की 1,000 बसें की आवाजाही रोक दी गई है। अब तक 150 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है और लोगों के सामने चारे का संकट पैदा हो गया है। प्रभावित लोगों के पास सरकारी मदद भी नहीं पहुंच पा रही है। राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में अब तक 630 गांव पानी में डूब चुके हैं। राहत एवं बचाव कार्य में 3,500 नावें लगाई गई हैं। राज्य की 94 तहसीलें सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। बाढ़ से इन जिलों में 78 करो़ड रूपये का नुकसान हुआ है। उधर, बिहार के गोपालगंज जिले में बाढ़ का पानी तेजी से कम हो रहा है और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 पर भी वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। पानी कम होने से लोगों को राहत मिली है। गोपालगंज जिले के एक अधिकारी ने गुरूवार को बताया कि पिछले 12 घंटे के दौरान अत्यधिक प्रभावित इलाकों रूपनछाप, सेमरिया, सोनबरसा आदि गांवों में बाढ़ का पानी ढाई से तीन फुट तक कम हो गया है जिससे लोगों को कुछ राहत मिली है। कई गांवों के ग्रामीण अब अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। बरौली प्रखण्ड मुख्यालय में भी पानी कम हो रहा है। मिर्जापुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 पर पानी कम होने से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है जबकि स़डक के मरम्मत का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। कई क्षेत्रों में हालांकि जलस्तर घटने के बावजूद पानी अभी भरा हुआ है।  

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