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टिहरी में जलस्तर बढ़ा, उत्तराखंड में बढा बाढ का खतरा

नई दिल्ली। टिहरी बांध में जलस्तर के 230 मीटर के खतरे के निशान को छू लेने के बाद जहां उत्तराखण्ड में बाढ़ का खतरा नजर आने लगा है है वहीं एक पर्यावरणविद ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि सरकार हिमालय क्षेत्र में इस तरह के ब़डे बांधों के निर्माण पर प्रतिबंध नहीं लगाती है तो ब़डी आपदाएं आ सकती हैं।

पर्यावरणविद अनिल जोशी ने टिहरी से कहा, ""कम से कम 20 से 25 गांवों में पहले ही पानी पहुंच चुका है।"" उन्होंने कहा, ""यही समय है जब सरकार बांधों की व्यवहारिक उपयोगिता की समीक्षा कर सकती है। अंत में स्थानीय समुदायों को इसकी कीमत चुकानी प़डती है क्योंकि पानी को छो़डा नहीं जा सकता और इससे आस-पास के गांव डूबने लगते हैं।"" जोशी ने कहा, ""हर दिन लोगों के मरने की खबरें आ रही हैं और यदि बांध से पानी छो़डा जाता है तो इसके परिणामस्वरूप सभी नदियों खासकर गंगा और यमुना में जलस्तर बढ़ जाएगा और बचे हुए उत्तर भारत में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाएगा।"" जोशी ने "हिमालयन एनवायरॉनमेंटल स्टडीज एंड कन्जर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन" की स्थापना की है जो हिमालय के ग्रामीणों के विकास के लिए काम करता है।

उन्होंने सरकार से इस तरह के बांधों की व्यवहारिक उपयोगिता पर एक बार फिर विचार करने के लिए कहा है। जोशी ने कहा, ""इससे जु़डे कई मुद्दे हैं, बाढ़ के साथ आने वाली गाद बांधों में जमा हो जाती है और इस तरह इन बांधों की उम्र कम से कम पांच साल कम हो जाती है। इस साल अत्यधिक बारिश हुई है और भविष्य में ऎसी स्थितियां बार-बार पैदा हो सकती हैं क्योंकि जलवायु में तेजी से बदलाव हो रहा है।"" टिहरी बांध में जलस्तर बढ़ने के साथ नजदीक के गांवों और हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे शहरों व आस-पास के इलाकों में खतरा पैदा हो गया है।  

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