वाशिंगटन। अमेरिका की एक शीर्ष व्यापार संस्था चाहती है कि भारत एक ऎसी परमाणु जवाबदेही व्यवस्था अपनाए जिसमें पूरी जवाबदेही नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र संचालकों की हो और मुआवजे के दावों को निपटाने की केवल एक व्यवस्था हो। अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने सोमवार को एक बयान में कहा, ""अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुपूरक मुआवजा सम्मेलन (सीएससी) के ये सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बेहतर कार्य पद्धतियों के मूल हैं।""
भारत के साथ व्यापार करने वाली शीर्ष 300 कंपनियों की प्रतिनिधि संस्था ने कहा कि वास्तव में पूरी दुनिया में नागरिकों को संरक्षण देने के लिए नागरिक परमाणु कार्यक्रमों में ऎसे कानून बनाए गए हैं। सोमवार को भारतीय संसद में पारित हुए नागरिक परमाणु दायित्व विधेयक पर आरंभिक टिप्पणी में यूएसआईबीसी ने कहा, ""सीएससी के अनुरूप एक परमाणु दायित्व व्यवस्था दुर्घटना की स्थिति में तत्काल, निश्चित और पर्याप्त मुआवजा उपलब्ध कराकर भारतीय लोगों के हितों की सुरक्षा करेगी।"" संस्था ने कहा कि इससे दुनिया के सर्वाधिक जिम्मेदार आपूर्तिकर्ता भारत की ओर आकर्षित होंगे और भारतीय उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जु़ड जाएंगे। यूएसआईबीसी ने कहा कि सीएससी के अनुरूप प्रभावी जवाबदेही विधेयक की अनुपस्थिति से भारतीय और विदेशी दोनों तरह के निजी संस्थान भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से परहेज कर सकते हैं। इससे परमाणु ऊर्जा के विकास के भारत के प्रयासों में गतिरोध पैदा हो सकता है।
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परमाणु संयंत्र संचालकों की जवाबदेही चाहती है अमेरिकी संस्था





















