भुवनेश्वर। दक्षिण कोरियाई इस्पात कम्पनी पॉस्को को सुंदरगढ़ जिले में खनन की अनुमति देने सम्बंधी राज्य सरकार के आदेश को उ़डीसा उच्च न्यायालय द्वारा नामंजूर किए जाने के बाद प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
इस्पात और खनन मंत्री रघुनाथ मोहंती ने कहा, ""राज्य सरकार ने उच्चा न्यायालय के आदेश के खिलाफ शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की।""
उन्होंने कहा, ""राज्य के इस्पात और खनन विभाग ने खनन और खनिज (विकास और नियमन) कानून के तहत खंडाधार की खानों को पोस्को को देने का सुझाव दिया था। इसमें नियमों की अनदेखी नहीं की गई।""
उ़डीसा उच्चा न्यायालय की एक खण्डपीठ ने 14 जुलाई को राज्य सरकार की अनुमति खारिज कर दी थी। राज्य के सुंदरगढ़ जिले की पहाडियों में 2500 एक़ड क्षेत्र में पॉस्को को खनन की अनुमति मिली थी।
खंडाधार में खनन के लिए आवेदन करने वाली कम्पनियों में से एक जियोमिन मिनरल्स और मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड की अपील पर अदालत ने यह फैसला सुनाया था।
जियोमिन ने कहा था कि उसने क्षेत्र में खनन के लिए 1991 में सबसे पहले आवेदन किया था लेकिन उस आवेदन पर विचार नहीं किया गया।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को चार महीने के भीतर सभी लम्बित आवेदनों पर कार्रवाई करने के लिए कहा।
पॉस्को ने पारादीप बंदरगाह के करीब 1.2 करो़ड टन क्षमता वाले इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए 22 जून 2005 को एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
भारत समाचार
पॉस्को मामले में सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा उ़डीसा





















