कोई परिणाम नहीं मिला

No Result Found

भारत समाचार

गिलानी ने वार्ताकारों का बहिष्कार किया

श्रीनगर। हुर्रियत के कट्टरपंथी ध़डे के नेता सैयद अली गिलानी ने केंद्र सरकार द्वारा जम्मू एवं कश्मीर के लिए नियुक्त किए गए वार्ताकारों का बहिष्कार करने के लिए सोमवार को कश्मीरियों का आह्वान किया।
जबकि यहीं पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वार्ताकारों के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कश्मीर वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका स्वीकारी थी। अपने आवास पर मीडिया को सम्बोधित करते हुए गिलानी ने कहा, ""भारत सरकार ने हमारी पांच सूत्रीय मांगों को खारिज कर दिया है और इसलिए नई दिल्ली द्वारा नियुक्त वार्ताकारों के दल से हमें कुछ भी लेना-देना नहीं है।"" रविवार को नई दिल्ली से वापस कश्मीर पहुंचने के तत्काल बाद गिलानी को उनके घर में ही नजरबंद कर दिया गया। गिलानी ने कहा, ""मैं कश्मीरी जनता से भी अपील करता हूं कि वार्ताकारों से न मिलें और उनके दौरे का बहिष्कार करें।"" यद्यपि गिलानी के आवास के बाहर पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन मीडियाकर्मियों को गिलानी के आवास में प्रवेश करने से नहीं रोका गया। हुर्रियत कांफ्रेंस द्वारा वार्ताकारों का बहिष्कार केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकारों के दल के लिए एक ब़डी चुनौती है। वार्ताकारों के दल के अगुआ दिलीप पडगांवकर ने स्वीकार किया कि अलगाववादी हुर्रियत के दोनों ध़डों द्वारा वार्ताकारों से बातचीत न करने का निर्णय उनके लिए एक चुनौती है। उन्होंने रविवार को कहा था, ""यह कुछ ऎसा है, जिससे हमें पार पाना होगा। हम उन लोगों के दरवाजे खटखटाएंगे जो हमसे मिलने नहीं आते। हमारे साथ किसी प्रोटोकाल या पूर्वाग्रह की कोई दिक्कत नहीं है।"" गिलानी ने 28 अक्टूबर से शुरू होने वाले विरोध प्रदर्शन का एक नया कैलेंडर भी जारी किया।
इस कैलेंडर के अनुसार 28, 29 अक्टूबर और दो व चार नवम्बर को छो़ड कर बाकी आठ नवम्बर तक बंद और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। गिलानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रस्तावित भारत दौरे के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ""पिछली बार जब एक अमेरिकी राष्ट्रपति भारत दौरे पर आए थे, तो भारतीय सुरक्षा बलों ने छित्तीसिंहपोरा में सिख ग्रामीणों की हत्या की थी। हमें डर है कि वे आगामी दौरे के दौरान भी इस तरह का कुछ कर सकते हैं।"" गिलानी से यह पूछा गया कि कश्मीर घाटी में उनके बंद और विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रमों की लोग क्रमिक अवज्ञा कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा, ""अपने विरोध कार्यक्रम की पूर्ण सफलता के लिए मैं जनता को सलाम करता हूं। यदि कोई व्यक्ति निजी स्तर पर इसका उल्लंघन कर रहा है तो वह उसके और उसके विवेक के बीच का मामला होगा।"" गिलानी ने हुर्रियत के नरमपंथी ध़डे के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूख की उस अपील का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने जनता से आह्वान किया है कि उसे 27 अक्टूबर को श्रीनगर स्थित संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमाओजी) के कार्यालय तक मार्च में शामिल होना चाहिए। बहरहाल, तीनों वार्ताकारों ने सोमवार को अलगाववादी नेता शब्बीर शाह के परिजनों और पार्टी कार्यकर्ताओं से श्रीनगर में उनके आवास पर मुलाकात की। "जम्मू एंड कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी" के अध्यक्ष शाह को इस समय हिरासत में हैं और उन्हें पैरोल पर रिहा होने से इंकार कर दिया है। जबकि प्रशासन ने शाह के गिरते स्वाथ्य को देखते हुए उन्हें पेरौल पर रिहा करने का निर्णय लिया था। शाह को दो वर्षो से अधिक समय से सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक पत्रकार दिलीप पडगांवकर, राधा कुमार और सूचना आयुक्त एम. एम. अंसारी के दल ने सोमवार सुबह शाह के आवास पर जाकर उनके परिजनों और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। पार्टी के एक सूत्र ने बताया, ""शब्बीर शाह ने पैरोल पर रिहा नहीं होने का फैसला किया है। यदि प्रशासन शाह को वास्तव में रिहा करना चाहता है तो उसे उन पर लगा पीएसए हटाना होगा।"" कश्मीर घाटी का अपना दौरा पूरा करने के बाद तीन में से दो वार्ताकार बुधवार को जम्मू पहुंचेंगे। सूत्रों ने सोमवार को कहा कि दिलीप पडगांवकर और राधा कुमार जम्मू में होंगे, जबकि तीसरे वार्ताकार एम.एम.अंसारी नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे। जम्मू में जम्मू एवं कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी ने वार्ताकारों का बहिष्कार किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का रूख क्या होगा, इस बारे में अभी पता नहीं चल पाया है, खासतौर से इस संदर्भ में कि पडगांवकर ने कश्मीर को एक "विवाद" के रूप में बताया है और इस विवाद में पाकिस्तान को एक पक्ष भी बताया है। सूत्रों के अनुसार हो सकता है कि भाजपा वार्ताकारों से न मिलें। लेकिन अंतिम निर्णय का अभी इंतजार है। खबर है कि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के कुछ नेता भी पडगांवकर की टिप्पणी से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने अपनी नाराजगी सार्वजनिक नहीं की है। राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पडगांवकर के बयान का समर्थन किया है। उमर ने श्रीनगर में संवाददाताओं से कहा, ""जम्मू एवं कश्मीर मे पाकिस्तान की भूमिका के संदर्भ में वर्ताकारों ने जो कहा है उसमें कुछ भी गलत नहीं है। शिमला समझौते के बाद पाकिस्तान के साथ जब भी बातचीत हुई है, उसमें कश्मीर पर चर्चा हुई है।""

अन्य खबरें

ये भी पढ़ें

अन्य खबरें