रायपुर, 24 सितंबर। छत्तीसगढ के कोरबा बाल्को पावर प्लांट की चिमनी गिरने से मरने वालों की संख्या 35 पहुंच गई है। अभी भी यह संख्या और बढने की संभावना है, क्योंकि अस्पताल में भर्ती कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई और काफी संख्या में लोग मलबे में दबे होने की आशंका है। बचाव कार्य जारी है, लेकिन रूक-रूक हो रही बारिश से बाधा उत्पन्न हो रही है। जिस समय चिमनी गिरी उस समय मौके पर करीब एक हजार लोग काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया कि इस निर्माणाधीन चिमनी से बिजली टकराई और चिमनी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। चिमनी का मलबा उस स्टोर रूप पर गिरा जहां बरसात से बचने के लिए मजदूर शरण लिए हुए थे। कोरबा में बाल्को विस्तार योजना के तहत अपने एल्युमीनियम संयंत्र में 1200 मगावाट क्षमता का बिजली संयंत्र लगा रही है। चीनी कंपनी सेप्को को इस संयंत्र को लगाने का ठेका मिला है, जबकि जीडीसीएल इस 275 मीटर ऊंची चिमनी का निर्माण कर रही है और इसका 225 मीटर तक निर्माण हो चुका था। मगर इस हादसे में पूरी चिमनी मौत की चिमनी में तब्दील हो गई। दूसरी ओर हादसे के बाद मौके पर मजदूरों का हंगामा जारी है। रह-रहकर मजदूर कंपनी के कर्मचारियों से अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि इतने बडे हादसे के बावजूद कंपनी के बडे अधिकारी अब तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचे हैं। हादसे के बाद गुस्साए मजदूरों ने बुधवार को एक कर्मचारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, मगर यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह कर्मचारी सेप्को का था या जीडीसीएल का। बचाव कार्य में लगे लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। मजदूरों का गुस्सा इसलिए भी है कि कंपनी की तरफ मृतकों के परिवारों एवं घायलों को कोई मुआवजा का ऎलान नहीं किया गया है। मजदूरों के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश देने के साथ ही बाल्को प्रबंधक पर प्राथमिकी दर्ज करने आदेश दे दिए हैं। उन्होंने हादसे में मारे गए मजदूरों के परिवार वालों को भी एक-एक लाख रूपए देने की घोषणा की है।