नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गिथनर ने सोमवार को सबसे धनी 20 देशों के संगठन "जी 20" की कार्यसूचियों पर वार्ता की। इस हफ्ते 11-12 नवंबर को सियोल में होने वाली जी 20 वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हिस्सा लेंगे। एक अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के वित्त मंत्रियों की इस बातचीत में वैश्विक वित्त बाजार में स्थिरता लाने के उपायों, पूंजी के प्रवाह में तकनीकी सहयोग और ढांचागत क्षेत्र में पूंजी निवेश जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई।
यह वार्ता छह अप्रैल को शुरू हुई अमेरिका-भारत आर्थिक और वित्तीय साझीदारी के अंतर्गत हुई है। इस वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए गिथनर ने मुखर्जी को अगले साल अमेरिका आने का न्योता भी दिया। इसके बाद दोनों वित्त मंत्री हैदराबाद हाउस में ओबामा और मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हो रहे प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता में शामिल हुए। इससे पहले भारत-अमेरिका मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) फोरम की बैठक में मुखर्जी ने कहा कि 2008 की मंदी ने दुनिया भर के नेताओं को अर्थशास्त्र और वित्तीय सिद्धांतों, वित्तीय बाजार की कार्यप्रणाली और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर फिर से सोचने के लिए विवश किया है। उन्होंने कहा कि इस संकट से एक सीख तो यह मिली है कि आपसी तालमेल से ही ऎसी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। एक जगह की समस्या का समाधान करने के लिए हमें दूसरी जगह ब़डी समस्या नहीं ख़्ाडी करनी चाहिए। वित्त मंत्री ने अमेरिकी कारोबारियों को भारत के ढांचागत क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। भारत के सबसे ताकतवर सीईओ रतन टाटा और अमेरिका के हनीवेल के डैविड एम. भारत-अमेरिकी सीईओ फोरम के संयुक्त अध्यक्ष हैं और इंद्रा नूयी, मुकेश अंबानी, विक्रम पंडित, सुनील मित्तल, चंदा कोचर, दीपक पारेख जैसे दिग्गत कारोबारी इस फोरम के सदस्य हैं।




















