नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि स्वायत्तता की मांग करने वाले अलगाववादी समूहों से वार्ता करना और उन्हें प्रश्रय देना कश्मीर समस्या को सुलझाने की बजाए उलझाएगा, इसलिए केंद्र सरकार को कश्मीर घाटी के साथ-साथ जम्मू एवं लद्दाख के साथ बरसों से चले आ रहे भेदभाव के बारे में भी गंभीरता से विचार करना होगा।
विजयादशमी के अवसर पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित वार्षिक समारोह को सम्बोधित करते हुए भागवत ने कहा, ""जम्मू एवं कश्मीर में स्वायतत्ता की मांग करने वाले अलगाववादी समूहों व उनके नेतृत्व को ही विभिन्न वार्ताओं के माध्यम से मुख्य रूप से सुनना व प्रश्रय देना समस्या को सुलझाने की बजाए उसे और अधिक उलझाने वाला है। अत: हमें घाटी के साथ-साथ जम्मू एवं लद्दाख की कठिनाइयों व उनके साथ सालों से चले आ रहे भेदभाव के बारे में भी गम्भीरता से विचार करना होगा।"" उन्होंने कहा, ""घाटी में अलगाववादी तत्वों के बहकावे में आ गए नौजवानों एवं सामान्य जनता से बात अवश्य ही होनी चाहिए, पर इसके साथ ही समूचे राज्य के राष्ट्रवादी सोच के मुसलमानों, सिखों, बौद्धों, कश्मीरी पंडितों एवं अन्य हिन्दुओं की भावनाओं, आवश्यकताओं व आकांक्षाओं को भी ध्यान में रखना नितांत आवश्यक है। इन सब की सुरक्षा, विकास व आकांक्षाओं का विचार जम्मू एवं कश्मीर समस्या के सम्बन्ध में होना ही चाहिए। इन सब पक्षाें का विचार करने पर ही जम्मू एवं कश्मीर के सम्बन्ध में चलाई जाने वाली वार्ताएं सर्वसमावेशी और फलदायी हो सकेंगी।"" भागवत ने कहा, ""कश्मीर में ताजा संकट गंभीर व जटिलतर बन गया है। भारत सरकार को अलगाववादी तत्वों द्वारा कराए गए प्रायोजित पथराव के आगे झुकना नहीं चाहिए। सेना के बंकर्स हटाने से व उसके अधिकार कम करने से वहां भारत की एकात्मता व अखण्डता की रक्षा नहीं होगी। वर्ष 1994 में संसद में सर्वसम्मित से पारित प्रस्ताव में व्यक्त संकल्प ही अपनी नीति की दिशा होनी चाहिए। यह सदैव स्मरण रखना है कि महाराजा हरिसिंह के द्वारा हस्ताक्षरित विलयपत्र के अनुसार कश्मीर का भारत में विलीनीकरण अंतिम व अपरिवर्तनीय है।"" चीन को अ़ाडे हाथों लेते हुए भागवत ने कहा कि चीन के समर्थन से नेपाल में माओवादियों का उपद्रव ख़डा हुआ व ब़डा हुआ। नेपाल के उन माओवादियों का अपने देश के नक्सली आतंक के साथ भी संबंध है। कहीं-कहीं तो इस समस्या का भी अपने राजनीतिक स्वार्थो के लिए साधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। देश की सुरक्षा व प्रजातंत्र के लिए यह बात बहुत महंगी पडेगी।
भारत समाचार
अलगाववादी समूहों से वार्ता से समस्या उलझेगी : भागवत





















