नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ने से जहां बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं समूचे उत्तर भारत में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हो गए हैं। आपदा की वजह से अब तक कई की जान जा चुकी है और लाखों लोग बेघर हो गए हैं।
दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर बुधवार को एक बार फिर खतरे के निशान से 207 मीटर तक बढ़ गया। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से और पानी छो़डे जाने की वजह से नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से राजधानी में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उधर, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित उत्तर भारत के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 500 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है और चार लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रदेश से गुजरने वाले तीन राष्ट्रीय राजमार्गो पर यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ। सहारनपुर में दिल्ली-अंबाला राष्ट्रीय राजमार्ग-73 और मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को तीन दिन बाद यातायात फिर से शुरू हुआ, वहीं बिजनौर में दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 अब भी बंद है। प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बरसात और उत्तराखण्ड के कालागढ़, नंद सागर, भमगो़डा बांध से लाखों क्यूसेक पानी छो़डे जाने से बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर और फर्रूखाबाद जिलों में रामगंगा, मालन, कोसी और गंगा नदी उफान पर हैं, जिससे इन जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी, मोरना और मेरठ जिले के हस्तिनापुर क्षेत्र में ज्यादा तबाही हुई है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर, बागपत, मथुरा, आगरा में भी बाढ़ का प्रकोप बढ़ा है। उत्तराखण्ड स्थित बनबसा बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छो़डे जाने के कारण घाघरा और शारदा का जलस्तर 20 सेंटीमीटर बढ़ गया है। इससे बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर खीरी व बस्ती जिले तो पहले से ही घाघरा और शारदा का कहर झेल रहे हैं। अधिकारियों ने इन जिलों में बाढ़ से अब तक 20 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। इस बीच उत्तराखण्ड में बारिश जारी है। राज्य में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से हुई भारी क्षति को देखते हुए विधानसभा ने बुधवार को प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य को राष्ट्रीय आपदा ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग की। बिहार में बाढ़ से गोपालगंज जिले के करीब 60 गांव बुरी तरह प्रभावित हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। गोपालगंज के एक अधिकारी के अनुसार गंडक नदी का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग-28 और बरौली-सीवान मार्ग के ऊपर आने से आवागमन ठप्प हो गया है। अगले 24 घंटे में पानी बैकुंठपुर प्रखंड में प्रवेश कर जाने की आशंका है। कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है। हिमाचल प्रदेश में भी बुधवार त़डके से हो रही भारी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। इसकी वजह से प़डोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में बाढ़ की हालत और गंभीर हो सकती है। कुल्लू के उपायुक्त बी. एम. नंता ने बताया, ""भारी बारिश के चलते ब्यास और सतलुज नदियों में असामान्य तरीके से जलस्तर बढ़ गया है। लेकिन जलस्तर अभी खतरे के निशान तक नहीं पहुंचा है।"" चण्डीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग-21 जो मंडी और कुल्लू जिले के कुछ इलाकों में ब्यास नदी के साथ बना हुआ है। नदी में उफान के कारण राजमार्ग कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। सिरमौर और शिमला जिले से होकर गुजरने वाली यमुना नदी में भी हरियाणा में प्रवेश करने से पहले ही उफान देखा जा रहा है। इधर, हरियाणा के बाढ़ प्रभावित यमुनानगर हथनीकुंड बैराज के निकट यमुना के टूटे तटबंध की मरम्मत के लिए जिले के अधिकारियों ने बुधवार को सेना की मदद मांगी। निकटवर्ती कई गांवों में भरा यमुना का पानी हालंकि दूसरे दिन घटने लगा है।
भारत समाचार
उत्तर भारत में बाढ़ से लाखों प्रभावित





















