बेंगलुरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा गुरूवार को विधानसभा में फिर से विश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे जिस पर मतदान होगा। इसके मद्देनजर विधानसभा के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। राज्य के मौजूदा सियासी संकट में कई पेंच भी जु़ड चुके हैं। येदियुरप्पा सरकार यदि बहुमत साबित भी कर देती है तो उसका भविष्य उच्च न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगा। एक तरफ कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने विश्वास मत के बहिष्कार की धमकी दी है, वहीं उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि सरकार के विश्वास मत का असली फैसला अयोग्य ठहराए गए पांच निर्दलीय विधायकों की याचिका पर उसके फैसले पर निर्भर करेगा। यदि अदालत ने पांचों निर्दलीय विधायकों की अयोग्यता के खिलाफ फैसला दे दिया तो गुरूवार को विश्वास मत जीतने के बाद भी सरकार का भविष्य अधर मे होगा। निर्दलीय विधायकों की याचिका पर 18 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने बुधवार को मुख्यमंत्री को दूसरा मौका देते हुए 14 अक्टूबर तक विधानसभा में फिर से बहुमत साबित करने के लिए कहा था। गौरतलब है कि सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया ने विश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले 16 बागी विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य करार दिया था और इसके बाद येदियुरप्पा सरकार ने ध्वनिमत से विश्वासमत हासिल कर लिया था।
भारत समाचार
येदियुरप्पा के विश्वास प्रस्ताव पर फिर मतदान, सुरक्षा पुख्ता





















