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भारत समाचार

भाग कर शादी करने वालों की होगी हिफाजत

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि भागकर होने वाली शादियां और अंतर्जातीय विवाह जाति व्यवस्था से प्रभावित भारतीय समाज में आ रहे आम बदलाव का प्रकटीकरण हैं जिन्हें कमतर नहीं समझा जाना चाहिए और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऎसे दम्पति की प्रत़ाडना से हिफाजत करनी चाहिए। न्यायाधीश समर विशाल ने पुलिस को एक दम्पति को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश देते हुए कहा, "भागकर होने वाली शादियां आम बदलाव का प्रकटीकरण और कठोर जाति व्यवस्था का नतीजा है।
ऎसे विवाहों को खराब नजरों से नहीं देखा जाना चाहिए।" किसी अनुसूचित जाति के ल़डके से विवाह करने वाली ऊंची जाति की ल़डकी के माता पिता के नवविवाहितों की जिंदगी में दखल पर अदालत ने रोक लगा दी। अदालत ने इस पर गौर किया कि दम्पति लगातार डर के माहौल में रह रहे हैं और उन्होंने एक गोपनिय स्थान पर पनाह ली है।
ल़डकी के वयस्क होने और अपनी इच्छा के अनुसार विवाह करने पर गौर करते हुए अदालत ने कहा, "प्रताç़डत हो रहे और अपने माता-पिता की इच्छा के विरूद्ध विवाह कर चुके दम्पति मूल रूप से तब हमारे समाज से पृथक नहीं है जब उनका विवाह अंतर्जातीय या अंतरधार्मिक हो।"

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